सीतामऊ/नाहरगढ (तुलसीराम राठौर)मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद विकास खण्ड सीतामऊ द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता श्यामदास बैरागी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय एकात्म मानव दर्शन के जनक थे। उन्होंने पूंजीवाद और साम्यवाद दोनों की विसंगतियों पर कार्य किया और कहा कि सरकार को मनुष्य के चारों पुरुषार्थ – शरीर, बुद्धि, मन और आत्मा के विकास के लिए कार्य करना चाहिए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य भी थे।
इस अवसर पर फ़क़ीरचंद्र मालवीय ने कहा कि माता-पिता के असमय निधन के बाद भी उनका जीवन उज्ज्वल रहा। वे सदैव शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में विश्वास रखते थे। मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद के विकासखंड समन्वयक नारायणसिंह निनामा ने भी कार्यक्रम के उद्देश्य एवं पंडित दीनदयाल जी के जीवन के बारे में जानकारी दी ।
कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित दीनदयाल जी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ किया गया। कार्यक्रम का संचालन परामर्शदाता हरिओम गंधर्व ने किया। अतिथियों का स्वागत नवांकुर संस्था के दिलीप भटनागर, कैलाश गुर्जर,टीना सोनी, परामर्शदाता हेमंत गौड, चरण द्वारा किया गया। अंत में आभार कवि रजनीश शर्मा द्वारा माना गया।इस अवसर पर असाइनमेंट जमा करने वाले विद्यार्थी आरती सेमलिया एवं देवांश मालवीय नाटाराम का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद की नवांकुर संस्था, प्रस्फुटन समिति एवं मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास पाठ्यक्रम के समस्त विद्यार्थी उपस्थित रहे।