अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर शिक्षिका दीप्ति राजपूत ( पूर्व वार्डन ) स्वरचित लेखिका के रूप में मानद उपाधि से हुई सम्मानित नेपाल की साहित्यिक संस्था ने दिया सम्मान*

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 अनिल सक्सेना की रिपोर्ट

अमरावती : अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस २१ फरवरी के अवसर पर बाँदा जनपद के बाकरगंज निवासी सुभाष चंद्र राजपूत की सुपुत्री राजपूत दीप्ति राजपूत को नेपाल की राजधानी काठमांडू में मातृभाषा रत्न अंतर्राष्ट्रीय मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
यह उपाधि नेपाल की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन नेपाल द्वारा प्रदान किया गया। समारोह का मुख्य उद्देश्य नेपाल-भारत मैत्री संबंधों को सुदृढ़ करना, देवनागरी लिपि का संरक्षण एवं संवर्धन, तथा हिन्दी- नेपाली जैसी मैत्री भाषाओं का वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार करना था। साथ ही देश-विदेश के कवियों, लेखकों, साहित्यकारों एवं शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रोत्साहित करना भी कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य रहा।इस अवसर पर नेपाल और भारत सहित पांच देशों की।

 

लगभग एक हजार साहित्यिक एवं शैक्षणिक प्रतिभाओं को मातृभाषा रत्न मानव उपाधि तथा मातृभाषा गौरव सम्मान से अलंकृत किया गया। इसी क्रम दीप्ति राजपूत जो की वर्तमान में बांदा के नरैनी ब्लॉक में स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय मे पार्ट टाइम शिक्षिका क़े पद पर कार्यरत है उनके लेखन, साहित्यिक उत्थान के कार्य में दिए गए योगदान को देखते हुए मातृभाषारत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया. संस्था के अध्यक्ष आनंद गिरि मायालु तथा चयन समिति प्रमुख मंजू खरे द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर दीप्ति राजपूत को पहला मै खुद कौन हूँ और दसरे लेखन मे कालिंजर उत्सव हमारा स्वरचित लेख पर उनके मित्र परिवार द्वारा अभिनंदन करते हुए बधाईयां प्रेषित की है.

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