उरई। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने राजस्व वसूली में हो रही लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया। कलेक्ट्रेट सभागार में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में उन्होंने कर करेत्तर और राजस्व कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान आबकारी, परिवहन, विद्युत, खनन, स्टांप, नगर निकाय और वाणिज्यकर जैसे विभागों की वसूली लक्ष्य से काफी कम पाई गई, जिस पर डीएम ने गहरी नाराजगी जताई।
जिलाधिकारी ने लापरवाह अधिकारियों का वेतन रोकने और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सभी अधिकारी राजस्व वसूली को गंभीरता से लें और पूरी जिम्मेदारी से काम करें। समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ विभागों जैसे स्टांप, परिवहन और आबकारी ने वसूली तो की, लेकिन उसे सरकारी पोर्टल पर अपलोड नहीं किया। इस पर डीएम ने कड़ी फटकार लगाते हुए कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार लाने का आदेश दिया।
डीएम ने उप जिलाधिकारियों और तहसीलदारों को निर्देश दिया कि वे पाँच और तीन साल से लंबित राजस्व वादों का जल्द से जल्द निपटारा करें। उन्होंने कहा कि धारा 34 और 116 के मामले लंबित नहीं रहने चाहिए, इसके लिए विशेष प्रयास किए जाएं। इसके साथ ही, उन्होंने सरकारी जमीन, तालाबों और चारागाहों पर हो रहे अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त अभियान चलाने का आदेश दिया। डीएम ने चेतावनी दी कि अवैध कब्जे की शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाए।
जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि खतौनी पटल पर हेल्पलाइन नंबर और जरूरी जानकारियां अंकित कराई जाएं ताकि आम जनता को त्वरित सुविधा मिल सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनपद के विकास कार्यों को गति देने और शासन के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सभी विभाग पारदर्शिता, तत्परता और उत्तरदायित्व की भावना से काम करें।
इस बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) संजय कुमार, अपर जिलाधिकारी न्यायिक योगेंद्र सिंह, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे प्रेमचंद मौर्य, नगर मजिस्ट्रेट राजेश कुमार वर्मा, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उप जिलाधिकारी नेहा ब्याडवाल सहित सभी उप जिलाधिकारी, तहसीलदार और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे
