सोनू करबरिया की रिपोर्ट
बांदा। महुआ ब्लॉक की एक महिला पंचायत सचिव द्वारा कथित भ्रष्टाचार, कार्यों में अनियमितता और जिलाधिकारी के आदेशों की अवहेलना के आरोपों को लेकर क्षेत्र में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सचिव द्वारा न केवल विकास योजनाओं में अनियमितताएं की जा रही हैं, बल्कि जन शिकायतों की अनदेखी कर अभद्रता और धमकी देने जैसी घटनाएँ भी सामने आ रही हैं।
ग्राम मसुरी निवासी राममिलन ने जिलाधिकारी को दी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि डीएम के आदेश के बावजूद उनके बाबा स्वर्गीय मदनगोपाल का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया। वहीं पंचायत सदस्य देव कुमार मिश्रा सहित कई ग्रामीणों ने विकास कार्यों में लाखों रुपये के कथित घोटाले की जांच में भी गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि संबंधित सचिव अपने रोजगार सेवक पति के सहयोग से अपनी तैनाती वाली 11 ग्राम पंचायतों में मनमाने तरीके से कार्य कराती हैं और दावा करती हैं कि उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, इसलिए अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर सकते।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ग्राम पंचायतों की बकाया देनदारियों का भुगतान नहीं किया जा रहा और उल्टा भुगतान मांगने वालों को धमकाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो जन आंदोलन किया जाएगा।
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि महुआ ब्लॉक में अन्य पंचायत सचिवों को 1 से 8 ग्राम पंचायतें आवंटित की गई हैं, जबकि संबंधित सचिव को 11 पंचायतों की जिम्मेदारी कैसे दे दी गई। इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और शासन की छवि धूमिल हो रही है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है।
