‘भाजपा व कांग्रेस दोनों ही जीत का ताल ठोंक रहे हैं’’ अपने ही अपनों को छल करने लगे हैं

राजनीति

शिव शर्मा की ग्राउंड लेवल रिपोर्ट

राजनांदगांवः 18वीं लोकसभा चुनाव में सीधी टक्कर कांग्रेस व भाजपा के मध्य नजर आ रही है तीसरी षक्ति एक परिकल्पना है उसका अभ्युदय अभी काफी दूर है पूर्व में सोषलिस्ट पार्टी का जोर था मगर वह दफन हो गया है अंतिम दौर के समय में दोनों ही सियासी दल पूरी ताकत से अभियान में चल रहे हैं मगर जहां भाजपा के लिये खाई है तो वहीं कांग्रेस के लिये कार्यकर्ता कुंआ बने हुए हैं दोनों ही दल के नेता अपने-अपने दल के प्रत्याषी को धोखा देकर गच्चा देने के फिराक में नजर आ रहे हैं जहां भाजपा में भीतरघात की प्रबल सम्भावना बनी हुई है वहीं प्रत्याषी चयन के बाद से ही भाजपा नेता सत्ताधारी, सत्तासीन होने की वजह से उनके विरोध का स्वर मुखरित नहीं हुआ मगर भाजपाई टांग पकड़ कर खिंचने में कहीं भी कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं, वहीं कांग्रेस का एक बड़ा खेमा महापौर से नाराज होकर बिखर गया है, वन मैन षो पांच वर्शों तक चला उससे नाराज कार्यकर्ता कन्नी काट रहे हैं वे कांगेस प्रत्याषी को धोखा देकर विदा करने में लगे हैं कुल मिलाकर भीतरधात दोनों ही पार्टीयों में है मगर कांग्रेस की अपेक्षा भाजपा में भीतरघात कुछ ज्यादा बना हुआ है।
कांग्रेस में लोकसभा प्रत्याषी बनने की होड़ नहीं थी किसी भी विधायक या कद्दावर नेता ने लोकसभा टिकट के लिए अपनी ताल नहीं ठोंकी थी तथा विधान सभा चुनाव में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में आये बिखराव को समेटने तथा कांग्रेस ही नहीं भाजपा नेताओं के आग्रह व अनुनय निवेदन पर कांग्रेस का प्रत्याषी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेष बघेल को बनाया गया है। भाजपा का प्रत्याषी पूर्व से ही घोशित हो गया था उसे पटकनी देने के लिये इस महाभारत में षकुनी की भूमिका में भाजपा के कद्दावर नेता लगे हुये हैं जिनकी जमीन खिसक गयी है वे दोबारा प्रत्याषी नहीं बन सकते हैं इस बार भाजपा चुनाव में जीत जाती है तो फिर पूर्व का राजनीतिक समीकरण पूर्ववत् ही रह जायेगा फलस्वरूप दायित्वाधीन होने के बाद भी श्रीखण्डी की भूमिका में नजर आ रहे हैं न ही भाजपा न ही कांग्रेस के पास इस महासमर में रथ हांकने वाला कृश्ण है सभी निहत्थे पर वार करने के लिये कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं ऐसे में भाजपा या कांगे्रस का प्रत्याषी अपने-अपने तकदीर पर भरोसा करने के लिये मजबूर हो गये हैं भाजपा के पास खोना ही खोना है मगर कांगे्रस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है अपना वजूद व अस्तित्व बचाना कांगे्रस प्रत्याषी के लिये जरूरी हो गया है । कांगे्रस को भाजपाईयों एवं भाजपा को कांग्रेसियों का समर्थन अवष्य मिल रहा है मगर वह पर्दे के पिछे है जहां पर घनघोर अंधेरा छाया हुआ है जिनकी पहचान किया जाना अंधेरा छंटने के बाद ही सम्भव होगा दोनों ही पार्टी अपने तरकस से तीर निकाल कर चला रहे हैं, कांग्रेस प्रत्याषी भूपेष बघेल जब सत्तासीन थे तब उन्होंने राजनांदगांव षहर की उपेक्षा अवष्य किये हैं मगर खैरागढ़ व अम्बागढ़ चैकी को जिला बनाकर एक तोहफा प्रदान किया है।
राजनांदगांव जिले में राजनांदगांव विधानसभा को छोड़कर पूरी विधानसभा सीट कांगे्रस जीत गई मोहला मानपुर सीट व खैरागढ़ सीट कांग्रेस की झोली में है तथा कवर्धा व पंडरिया भाजपा के पास है जनसंख्या और घनत्व की दृश्टि में कांग्रेस की स्थिति बेहतर है। कांग्रेस षासन काल में भूपेष बघेल के खास माने जाने वाले एक नेता ने बेहिसाब घन कमाने के बाद अपने आपको किनारा कर लिया क्योंकि महादेव एप का डंडा उसको जेल में दिखायी देने लगा है वह पूरे चुनाव अभियान में कहीं नजर नहीं आया है न उनके समर्थकों का होर्डिंग्स में नाम व फोटो नजर आ रहा है मगर भाजपाईयों का कहना है कि, चुनाव के बाद गड़े मुर्दे उखाड़ा जायेगा ऐसे में उस नेता का क्या होगा उसकी स्थिति ‘‘धोबी का कुत्ता न घर का ना घाट का’’ जैसा लगता है।
चुनाव विष्लेशण व समीक्षा से यह नहीं कहा जा सकता है कि ‘‘ऊँट किस करवट बैठेगा’’ अभी चुनाव में अंतिम दो दिनों में जीत हार की दिषा बदलती है कांग्रेस प्रत्याषी मंझे हुए प्रत्याषी हैं उनका कद किसी भी कीमत पर कम नहीं है एक कद्दावर पर्सनालिटी है यह बात अलग है कि वे धोखे का षिकार हो जाये अपनों को अपने से ही पग-पग पर धोखा है मगर इस पग पर चलना पड़ेगा वही स्थिति भाजपा प्रत्याषी के साथ ही बना हुआ है उन्होंने अपने 5 वर्शीय कार्यकाल में दो ही कार्यकर्ता बना सके षेश भाजपा के कार्यकर्ता हैं वैसे अभी फायरब्राण्ड व्यापारियों का एक दल उनके साथ चल पड़ा है जो पहले पूर्व सांसदों के साथ था जिनका उद्देष्य राजनीति के आड़ में धन कमाना ही है जिनकी औकात कौड़ी भर की नहीं है जो विभिन्न संगठन व संस्थाओं से जोड़कर अपनी औकात बताते हैं जिनको प्रोजेक्ट करने वाले उनके अपने ही होते हैं यह चर्चा राजनीतिक गलियारों में चल रही है क्या भाजपा नेता कांग्रेस के कद्दावर नेता पूर्व मुख्यमंत्री भूपेष बघेल को मात दे सकते हैं या कांग्रेस भाजपा के हिन्दूवादी संघ प्रिय नेता संतोश पाण्डे को पटकनी दे सकते है यह वक्त का तकाजा ही तय करेगा, समय से पहले और भाग्य से अधिक किसी को नहीं मिलेगा इंतजार करिये ।

संतोश पाण्डे भाजपा प्रत्याषी भूपेष बघेल कांग्रेस प्रत्याषी

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