अनिल सक्सेना की रिपोर्ट
*बांदा: । * ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो में बुंदेलखंड के बांदा जिले का ऐतिहासिक शजर पत्थर अपनी चमक को खूब बिखेर रहा है। सीएम योगी की महत्वाकांक्षी ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ योजना के अंतर्गत बांदा से गए शिल्पकार द्वारिका प्रसाद सोनी और अर्जुन गुप्ता ने इस वैश्विक मंच पर अपना स्टॉल लगाया है जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
*हाल नम्बर 9 में अपनी चमक को बिखेर रहा शजर*
इंटरनेशनल ट्रेड शो में हॉल नंबर 9 में स्थित बांदा के इस ओडीओपी स्टॉल पर शजर की खूबसूरती को निहारने और खरीदारी करने के लिए रोजाना लगभग 5 से 6 हजार लोग पहुंच रहे हैं। स्टॉल संचालक द्वारिका प्रसाद सोनी ने बताया कि अब तक इस ट्रेड शो में लगभग चार लाख रुपये की मेरी बिक्री हो चुकी है। इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के माध्यम से शजर पत्थर को वैश्विक स्तर पर एक बड़ा प्रमोशन मिल रहा है और इसकी प्राकृतिक नक्काशी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
*विदेशी मेहमानों को भा रही शजर की कारीगरी*
इस ट्रेड शो की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही है कि बांदा के इस स्टॉल पर अब तक विभिन्न देशों के लगभग 300 विदेशी लोग आ चुके हैं। विदेशी मेहमानों ने पत्थरों के भीतर छिपी कुदरत की इस कारीगरी को न सिर्फ अचंभित होकर देखा बल्कि कई लोगों ने बड़े पैमाने पर इसकी खरीदारी भी की। स्टॉल पर शजर से निर्मित अंगूठी, पेंडल और नेकलेस जैसे आकर्षक आभूषणों की भारी मांग है। इसके अलावा, शिल्पकारों द्वारा शजर पत्थर पर तराशे गए भारत के नक्शे, राष्ट्रीय पक्षी मोर, उत्तर प्रदेश के मानचित्र, भव्य शिव मंदिर और केदारनाथ मंदिर की कलाकृतियां लोगों की भारी भीड़ को अपनी ओर खींच रही हैं।
*कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने की सराहना, शिल्पकारों ने जताया योगी सरकार का आभार*
शिल्पकार द्वारिका प्रसाद सोनी ने बताया कि सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने भी उनके स्टॉल का दौरा किया। उन्होंने बांदा के शजर पत्थर की अनोखी चमक और स्थानीय कारीगरों की अद्भुत हस्तशिल्प कला की जमकर सराहना की और शिल्पकारों का हौसला बढ़ाया। द्वारिका प्रसाद ने इस वैश्विक मंच को उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार का आभार जताते हुए कहा कि ‘ओडीओपी’ योजना के कारण ही आज बांदा के इस लुप्त हो रहे पारंपरिक उद्योग को नया जीवन मिला है। सरकार के इन प्रयासों से शजर को अब अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिल रही है जिससे न केवल बांदा के गौरव में वृद्धि हुई है बल्कि स्थानीय कारीगरों के लिए रोजगार के नए मार्ग भी खुले हैं।