नरैनी में आस्था पर प्रहार: प्राचीन कारू देवी मंदिर की प्रतिमा खंडित, क्षेत्र में आक्रोश 

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         सोनू करवरिया की रिपोर्ट

नरैनी (बांदा)। कस्बे के प्रसिद्ध एवं श्रद्धा के केंद्र प्राचीन कारू देवी मंदिर में अराजक तत्वों द्वारा देवी प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना से नगर एवं क्षेत्र में भारी रोष व्याप्त है। अज्ञात लोगों ने देवी मां की प्रतिमा में लगी चांदी की आंखें निकालकर फेंक दीं तथा देवी मां का दाहिना हाथ खंडित कर दिया।

जानकारी के अनुसार मंदिर में आने वाले भक्तों द्वारा बताया गया कि सुबह लगभग 8:30 बजे नियमित पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे थे। उस समय देवी प्रतिमा पूरी तरह सुरक्षित एवं यथास्थिति में थी। इसके बाद दोपहर लगभग सुबह 9 बजे जब कुछ महिलाएं पूजा-पाठ के लिए मंदिर पहुंचीं तो उन्होंने प्रतिमा को खंडित अवस्था में देखा। देवी मां की चांदी की आंखें चरणों के पास पड़ी मिलीं, जबकि प्रतिमा का टूटा हुआ हाथ की कुछ टुकड़े नीचे पड़े हुए थे।

घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं कस्बावासी मंदिर पहुंच गए। सूचना पर पुलिस भी तत्काल मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू की। घटना की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य एवं नमूने एकत्र किए।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह घटना सुबह 9 बजे से 10:30 बजे के बीच की मानी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह 9 बजे तक मंदिर में श्रद्धालुओं का आना-जाना रहता है तथा पुजारी भी पूजा संपन्न कर अपने घर चले जाते हैं। इसके बाद दोपहर के समय मंदिर परिसर अपेक्षाकृत सुनसान रहता है, जिसका फायदा उठाकर अराजक तत्वों ने इस घटना को अंजाम दिया।

कस्बे एवं क्षेत्र के लोगों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। कई लोगों का मानना है कि यह कृत्य असामाजिक एवं नशे के आदी तत्वों द्वारा किया गया हो सकता है। वहीं पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कोतवाली प्रभारी भास्कर मिश्रा ने बताया कि मामले में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है तथा घटना में शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा।

नगरवासियों एवं श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि धार्मिक स्थलों की पवित्रता एवं लोगों की आस्था पर इस प्रकार के हमलों की पुनरावृत्ति न हो सके।

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