*कृषि विश्वविद्यालय में एनआईएफ–डीएसटी वित्तपोषित छह दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम*

Blog

अनिल सक्सेना की रिपोर्ट

बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा के कृषि अर्थशास्त्र विभाग द्वारा राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान (NIF-DST, भारत सरकार) के सौजन्य से संचालित परियोजना के अंतर्गत छह दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर की नवाचार प्रौद्योगिकियों के माध्यम से कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन, ग्रामीण आजीविका में सुधार और उद्यमिता विकास को बढ़ावा देना है, ताकि कृषक व्यावहारिक कौशल सीखकर स्वयं का उद्यम स्थापित कर सकें।
​कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य रूप से कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. जी. एस. पंवार, निदेशक अनुसंधान प्रो. जगन्नाथ पाठक तथा निदेशक प्रशिक्षण एवं नियोजन प्रो. बी. पी. मिश्रा उपस्थित रहे। अतिथियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण एवं ग्रामीण आधारित उद्यमिता ही किसानों की आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण में सिखाई जा रही तकनीकों को अपनाकर स्वरोजगार और कृषि-आधारित उद्योगों की स्थापना की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के वैज्ञानिक डॉ. नवनीत भी विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने बताया कि यह 6 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों, एफपीओ और एनजीओ प्रतिनिधियों को 6 प्रमुख जमीनी नवाचार मशीनों पर व्यावहारिक प्रदर्शन और प्रशिक्षण देने के लिए आयोजित किया गया है।
​20 से 25 जुलाई, 2026 तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ किसानों को विस्तृत तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। मुख्य प्रशिक्षक एवं यमुनानगर (हरियाणा) के प्रसिद्ध खाद्य प्रसंस्करण विशेषज्ञ श्री प्रिंस कम्भोज मशीनों पर दो दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग के डॉ. प्रतीक शुक्ला, केवीके बांदा की विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ञा ओझा और डॉ. दीक्षा पटेल ने फल प्रसंस्करण एवं उत्पाद निर्माण के तकनीकी सत्रों में सहयोग किया। कृषि अभियांत्रिकी एवं फार्म मशीनरी विशेषज्ञ डॉ. शशांक शेखर और डॉ. गजेंद्र सिंह मशीनों की तकनीकी बारीकियों को समझाया वहीं डॉ. अमित यादव ने प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को सूक्ष्मजैविक (माईक्रोबियल) एवं फंगल संक्रमण से सुरक्षित रखने के उपाय बताये। इसके अलावा कुलभास्कर आश्रम पीजी कॉलेज, प्रयागराज के कृषि अर्थशास्त्री डॉ. पुनीत कुमार अग्रवाल किसानों को उत्पादों के आर्थिक मूल्यांकन, विपणन और उद्यम विकास के गुर सिखाए।
​इस प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रतिभागियों को मुख्य रूप से 6 नवाचार प्रौद्योगिकियों का प्रत्यक्ष अभ्यास कराया जा रहा है। इनमें बहुउद्देशीय खाद्य प्रसंस्करण मशीन शामिल है, जिससे लगभग 120 प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। शुरुआती दो दिनों में इस मशीन के माध्यम से आम का जूस, संतरे का जूस, टोमैटो केचप, सॉस, टोमैटो प्यूरी, एलोवेरा जूस, एलोवेरा जेल, एलोवेरा साबुन, हर्बल शैम्पू, गुलाब जल, पपीते का जैम और चिली सॉस जैसे मूल्य संवर्धित उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को सब्जी बीज निकालने की मशीन, जैविक खाद बनाने की मशीन, उन्नत दाल मिल आदि मशीनों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जा रहा है।
​इस संपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल संचालन एवं आयोजन परियोजना संचालक डॉ. पुष्पा यादव के नेतृत्व में किया जा रहा है, जिसमें डॉ. अभिषेक कालिया, डॉ. पंकज कुमार ओझा एवं डॉ. यश गौतम सह-संयोजक की भूमिका निभा रहे हैं। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने में मील का पत्थर साबित होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *