सनत कुमार बुधौलिया की रिपोर्ट
उरई।अगर कोई मुकदमा वर्षों से न्यायालय में लंबित है और परेशान हैं, तो 12 सितंबर 2026 का दिन आपके लिए बेहद अहम है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जालौन के तत्वावधान में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत लंबित विवादों को आपसी सुलह-समझौते के जरिए शीघ्र और अंतिम रूप से निस्तारित कराने का बड़ा अवसर लेकर आ रही है। खास बात यह है कि लोक अदालत में मामलों के निस्तारण के लिए किसी प्रकार का शुल्क देय नहीं होगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मनाली चंद्रा ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में लघु प्रकृति के आपराधिक वादों के साथ विभिन्न न्यायालयों और विभागों से संबंधित ऐसे मामलों का निस्तारण कराया जाएगा, जो राष्ट्रीय लोक अदालत में संदर्भित किए जा सकते हैं। तहसील न्यायालय से लेकर उच्च स्तर के न्यायालयों तक लंबित उपयुक्त मामलों के पक्षकार आवेदन देकर आपसी सहमति के आधार पर अपने विवाद का अंतिम समाधान प्राप्त कर सकते हैं। राष्ट्रीय लोक अदालत में शमनीय आपराधिक वाद, स्टांप एवं राजस्व वाद, बैंक ऋण वसूली, भूमि अधिग्रहण, उपभोक्ता फोरम, वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद, टैक्स संबंधी मामले, बिजली चोरी, बैंक बाउंस एवं धारा 138 एनआई एक्ट, चालान, श्रम विभाग और जलकर सहित विभिन्न मामलों का निस्तारण कराया जा सकता है। वहीं न्यायालय में अभी दाखिल न हुए मामलों को भी प्री-लिटिगेशन स्तर पर, विशेषकर पारिवारिक विवादों को, सुलह-समझौते के माध्यम से समाप्त कराने का अवसर मिलेगा। राष्ट्रीय लोक अदालत की सबसे बड़ी ताकत उसका सरल और समझौता आधारित स्वरूप है। यहां पक्षकार स्वयं पहल कर अपने विवाद को निस्तारण के लिए ला सकते हैं। आपसी सहमति से मामला समाप्त होने पर वर्षों तक चलने वाली मुकदमेबाजी, समय और खर्च से राहत मिल सकती है। लोक अदालत में पारित निर्णय अंतिम होता है और उसके विरुद्ध सामान्यतः अपील का प्रावधान नहीं होता। सचिव मनाली चंद्रा ने जनपदवासियों से अपील की कि जिनके मामले राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारित किए जा सकते हैं, वे इस अवसर का लाभ उठाएं और 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत में अपने विवाद का शांतिपूर्ण एवं त्वरित समाधान कराएं। उन्होंने कहा कि त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय नागरिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और राष्ट्रीय लोक अदालत इसी दिशा में प्रभावी माध्यम है।