भक्ति व श्रद्धा के साथ श्रीमद् भागवत कथा मे वही रसदार रसधार*

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अनिल सक्सेना की रिपोर्ट

बांदा – श्री मद्भागवत कथा श्रद्धेय श्री राम हृदय दास जी जिज्ञासु जी श्री रामायण कुटी चित्रकूट के मुखारविंद से गोवर्धन लीला का किया भावपूर्ण वर्णन रामलीला मैदान में में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का समापन को श्रद्धा और भक्ति के माहौल में हुआ. कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे. जिसमें महिलाओं की संख्या अधिक रही. कार्यक्रम की शुरुआत आरती के साथ की गई. इसके बाद कथा वाचक जिज्ञासु जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति के महत्व से अवगत कराया. महाराज ने कहा कि वृंदावन में गोवर्धननाथ साक्षात नारायण के रूप में विराजमान हैं, जो लगभग सात कोस यानी करीब 21 किलोमीटर क्षेत्र में फैले हुए हैं. वहीं यमुना जी को प्रत्यक्ष देवी के रूप में पूजा जाता है. उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण के कहने पर व्रजवासियों ने इंद्र की पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू की थी, जिससे देवराज इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने घोर वर्षा कर दी. उन्होंने आगे बताया कि लगातार सात दिन और सात रात तक मूसलाधार बारिश होती रही, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर व्रजवासियों को उसके नीचे आश्रय दिया. सात वर्षीय कन्हैया की इस अद्भुत लीला से इंद्र का अहंकार टूट गया. बाद में वह सुरभि गाय को साथ लेकर भगवान कृष्ण से मिलने पहुंचे. कथा के दौरान महाराज ने विभिन्न भक्ति प्रसंगों के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया कि गृहस्थ जीवन के कार्य करते हुए भी भगवान की भक्ति करना संभव है. यही जीवन का सच्चा मार्ग है. श्री राम कथा समिति के अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू जी ने बताया की कार्यक्रम के समापन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों के साथ-साथ आसपास के श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. इस अवसर पर श्री राम कथा समिति के प्रेम किशोर श्रीवास्तव विजय ओमर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे.

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