मृतक के नाम का सहारा लेकर हड़पी करोड़ों की जमीन, तहसीलदार-लेखपाल समेत 7 पर मुकदमा दर्ज

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 सोनू करबरिया की रिपोर्ट

 

 

बांदा। जनपद बांदा में जमीन से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक मृतक व्यक्ति के नाम का लाभ उठाकर करोड़ों रुपये की जमीन हड़पने का आरोप लगा है। इस मामले में न्यायालय के आदेश पर नरैनी तहसील के तत्कालीन तहसीलदार, लेखपाल और सब-रजिस्ट्रार सहित कुल सात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है।
जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता आनन्दी प्रसाद (75 वर्ष) निवासी ग्राम पचोखर ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 में उनके पिता रामेश्वर ने अपने भाई शम्भू दयाल से दानपत्र के माध्यम से जमीन का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त किया था। इसके बाद वर्ष 1994 में आनन्दी प्रसाद ने शेष जमीन भी शम्भू दयाल से बैनामा करवा ली थी और तभी से वह जमीन उनके कब्जे में थी।
पीड़ित के अनुसार राजस्व अभिलेखों (खतौनी) में सहवन त्रुटि के कारण मृतक शम्भू दयाल का नाम पूरी तरह से नहीं कट पाया था। इसी त्रुटि का फायदा उठाते हुए गांव के ही रामप्रकाश ने कथित तौर पर राजस्व कर्मियों से मिलीभगत कर अपनी पत्नी दीपा के नाम पर जमीन हड़पने की साजिश रची। आरोप है कि आरोपियों ने वृद्धावस्था और मानसिक स्थिति का लाभ उठाकर राजस्व व निबंधन विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ की और 23 जून 2024 को फर्जी तरीके से जमीन का पंजीकरण करा लिया।
इस धोखाधड़ी का खुलासा उस समय हुआ जब शिकायतकर्ता ने सितंबर 2025 में खतौनी की नकल निकलवाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) बांदा के आदेश पर 04 मार्च 2026 को थाना अतर्रा में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
नामजद आरोपी:
रामप्रकाश (मुख्य आरोपी), दीपा (रामप्रकाश की पत्नी), जगदीश प्रसाद, रामप्रसाद (गवाह), तत्कालीन लेखपाल पंकज अवस्थी, तत्कालीन तहसीलदार नरैनी तथा तत्कालीन सब-रजिस्ट्रार नरैनी।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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