सनत कुमार बुधौलिया की रिपोर्ट
बांदा।
उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986 (गैंगस्टर एक्ट) के अंतर्गत कुख्यात अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगस्टर कोर्ट ने दो शातिर माफियाओं को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को 07-07 वर्ष के कठोर कारावास तथा ₹5000-₹5000 के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में दोनों को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों अभियुक्तों के विरुद्ध सजायबी वारंट जारी कर उन्हें कारागार भेज दिया गया।
विशेष लोक अभियोजक (गैंगस्टर एक्ट) सौरभ सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि थाना कोतवाली नगर, जनपद बांदा के प्रभारी निरीक्षक विवेकानंद तिवारी द्वारा दिनांक 10 अक्टूबर 2011 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। अभियुक्त जावेद उर्फ बुद्धू पुत्र जाकिर अली, निवासी लोहार तलैया तथा असलम पुत्र बाबू हनीफ, निवासी खाई पार, थाना कोतवाली नगर, बांदा के विरुद्ध मु0अ0सं0 918/2011, धारा 2/3 गैंगस्टर एक्ट के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया था।
अभियोजन के अनुसार अभियुक्तों का एक संगठित आपराधिक गिरोह है, जिसका सरगना जावेद उर्फ बुद्धू है जबकि असलम उसका सक्रिय सदस्य है। यह गिरोह अवैध असलहों के बल पर हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, डकैती, चोरी एवं राहजनी जैसे संगीन अपराधों को अंजाम देकर अवैध धन अर्जित करता रहा है। जावेद उर्फ बुद्धू के विरुद्ध 05 से अधिक गंभीर आपराधिक मुकदमे, जबकि असलम के विरुद्ध 04 संगीन मुकदमे पहले से दर्ज हैं।
गैंगस्टर एक्ट के इस मुकदमे की विवेचना निरीक्षक हवलदार सिंह द्वारा की गई। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 04 गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। प्रभावी पैरवी, साक्ष्यों के गहन अवलोकन एवं ठोस अभियोजन के आधार पर अपर सत्र विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर कोर्ट) एडीजे प्रदीप कुमार मिश्रा ने दोनों अभियुक्तों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
विशेष लोक अभियोजक सौरभ सिंह ने बताया कि वर्ष 2011 में इस गिरोह ने दो लोगों की गोली मारकर हत्या की थी, जिसका मुकदमा अभी न्यायालय में विचाराधीन है। इन अपराधियों के आतंक के कारण आसपास के जनपदों में दहशत का माहौल था और भयवश कोई भी व्यक्ति इनके विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराने या गवाही देने का साहस नहीं कर पाता था।
मुकदमे के वादी द्वारा अभियुक्तों का गैंग चार्ट तैयार कर जिलाधिकारी, बांदा से अनुमोदन प्राप्त करने के उपरांत गैंगस्टर की कार्रवाई की गई थी। न्यायालय ने अपने आदेश में इन अपराधियों को दुर्दांत, शातिर और समाज के लिए अत्यंत खतरनाक करार दिया।
