सुशील कुमार मिश्रा की रिपोर्ट
बांदा । साड़ी खादर के खण्ड संख्या 77 में वैद्य पटटों पर अवैध तरीके से बालू के हो रहे खनन की चर्चा जनपद बांदा में चारो ओर जोरो पर है। बांदा जिले में चारो तरफ बालू के अवैध खनन और परिवहन को लेकर हो हल्ला मचा हुआ है। जनपद में इस असम कुल 12 बालू खदाने संचालित हैं। जिसमें साड़ी खण्ड 77 खदान में जमकर अवैध खनन किया जा रहा है।
साडी 77 में बालू के हो रहे अवैध खनन में अशोक की बादशाहत कायम है। खनन कारोबारी के द्वारा प्रशासन की आंख में धूल झोंकने का ऐसा षडयंत्र रचा गया है, जिसमें स्थानीय प्रशासन की तो मौज है किसानों की पूरी तरह से आफत है। सूत्रों के मुताबिक किसानों को डरा धमका कर सादे स्टाम्प पेपरों पर दस्तखत करा लिये गये है ताकि अगर कोई बगावत करता है तो कोरे कागजों को अपने मन मुताबिक लिखकर जांच कर्ताओं के सामने पेश कर सके। सूत्रों का दावा है कि जब हम किसानों के द्वारा तहसील प्रशासन से खेतों में बनाये जा रहे अवैध तरीके से रास्ते निर्माण की शिकायत की जाती है तो वहां से जांच करने आने वाला सरकारी कर्मी बालू कारोबारियों से मिलकर जमीन की नाप ही बदल देता है। साडी 77 में बालू कारोबारियों की मनमानी का आलम तो इतना बुरा है कि इन लोगों ने बालू का कारोबार करने के लिये गांव सभा की जमीन तक को नहीं छोड़ा। सूत्रों का कहना है कि गांटा संख्या 101 से लेकर 4 नम्बर में गांव सभा की जमीन भी आती है, जिसमें भरपूर मात्रा मे बालू है, गांव सभा की जमीन सरकारी होने के बावजूद बालू कारोबारियों के द्वारा अवैध तरीके से बालू का खनन करके अपने कारोबार को उन्नतिशील बनाया जा रहा है। गौरतलब हो कि बांदा में मजदूरों के पलायन को रोकने के लिये यूपी सरकार के द्वारा बालू या अन्य खनिज पटटों का आवंटन करना शुरू किया गया है ताकि स्थानीय मजदूरों को उनके गांव क्षेत्र में ही रोजगार मिल सके और यहां के मजदूर दूर देश कमाने को न जाये और पलायन को रोका जा सके। साडी 77 के बालू कारोबारी/माफिया के द्वारा साडी के मजदूरों को काम न देकर पूरे मजदूर बाहर से मंगवाये गये है ताकि कोई भी अवैध खनन की बात प्रशासन तक न पहुंचा सके। साडी 77 में लगभग एक दर्जन पोकलैण्ड मशीने बालू का अवैध खनन करने के लिये लगाई है, इतना ही नहीं जेसीबी मशीनों की भी तैनाती की गयी है। साडी 77 में इस समय बालू का खनन केन के तटीय क्षेत्र व खेतिहर भूमिधरी जमीनों से खनन किया जा रहा है। मैनेजमेंट में माहिर रायबरेली निवासी की चतुर चालों के चलते गांव के रसूकदार लोगों को मैनेज कर खेतिहर किसानों को पूरी तरह से दबा दिया गया है। सूत्रों का यह भी कहना है कि तहसील प्रशासन पूरी तरह से बालू माफियाओं की गिरफ्त में है, जिला प्रशासन पर निगरानी बनाने के लिये रातो दिन लोकेटर निगरानी करते हैं ताकि अगर अधिकारी जांच करने या अवैध खनन रोकने के लिये आ रहा है तो बालू कारोबारी को लोकेटरों के जरिये जानकारी मिल सके। साडी 77 के अवैध कारनामों का खुलसा लगातार जारी रहेगा।
