सुनील सक्सेना की रिपोर्ट
बांदा। bखनन और परिवहन विभाग पर शासन की सख़्ती के बाद बड़े ट्रकों की निगरानी बढ़ी, लेकिन फतेहपुर–बांदा बॉर्डर पर छोटे वाहनों से अवैध मोरम ढुलाई का खेल और तेज हो गया है। आरोप है कि कुछ नाका चौकियों पर ‘सिस्टम’ सेट कर हल्के ट्रैक्टर और ठेलियों को बिना पास व इंट्री के लगातार निकाला जा रहा है।
फतेहपुर, बांदा, रायबरेली और हमीरपुर जिलों में अवैध खनन को लेकर शासन की उच्चस्तरीय टीमों ने हाल ही में सख्त कार्रवाई शुरू की। बड़े ट्रकों पर निगरानी और ओवरलोड की जांच बढ़ने से जहां कई जिलों में हड़कंप मचा, वहीं स्थानीय स्तर पर नए हालात पैदा हो गए।
चर्चा का केंद्र बांदा जिले की बेंदा घाट चौकी और फतेहपुर जिले की दतौली चौकी है, जहां से छोटी गाड़ियों—विशेषकर सिंगल चक्का ठेलियों और हल्के ट्रैक्टरों—द्वारा अवैध मोरम ढुलाई बढ़ने के आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि बड़े वाहनों की तुलना में ये वाहन कम ध्यान आकर्षित करते हैं और इसी वजह से बड़ी मात्रा में चोरी की मोरम इनके जरिए पास कराई जा रही है।
इन वाहनों को न तो किसी पास की आवश्यकता होती है और न ही कोई आधिकारिक इंट्री कराई जाती है। आरोप है कि बॉर्डर की चौकियों पर सीधे पहुंचकर वाहन मालिक ‘सिस्टम’ सेट कर लेते हैं, जिसके बाद बेंदा घाट से फतेहपुर तक कम दामों में मोरम बेची जाती है। इससे न केवल बड़े ट्रांसपोर्टरों को नुकसान होता है, बल्कि सरकारी राजस्व की भी भारी हानि होती है।
लोगों का कहना है कि खनन विभाग पर चल रही कार्रवाइयों के शुरुआती दिनों में स्थिति सुधरी भी थी, लेकिन अब हालात फिर पुराने रूप में लौट आए हैं। ग्रामीणों और स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, रात–दिन सैकड़ों छोटी गाड़ियां मोरम ढोते हुए देखी जाती हैं।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि छोटे वाहनों पर भी बड़े वाहनों की तरह GPS और इंट्री व्यवस्था लागू की जाए। साथ ही, बॉर्डर चौकियों पर जवाबदेही बढ़ाए बिना इस धंधे पर लगाम लगाना मुश्किल है।
छोटे वाहनों से बड़ी कमाई
• हल्के ट्रैक्टर और ठेलियों पर अधिकारियों का कम ध्यान
• कम लागत और बिना पास–इंट्री के सीधी ढुलाई
• बड़ी संख्या में वाहनों से चौकियों की कथित आमदनी अधिक राजस्व को भारी नुकसान
• बड़े ट्रांसपोर्टर टैक्स देकर चलते हैं, लेकिन
• छोटे वाहनों द्वारा बिना भुगतान ढुलाई
• लगातार हो रही चोरी से सरकारी खजाने को सीधा असर
