संघर्ष से सफलता तक का सफर , पांचो जयते बनी सफल महिला उद्यमी

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   शिव शर्मा की रिपोर्ट

 

*मोहला i ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं, बल्कि समाज में अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं। ऐसी ही कहानी है श्रीमती पांचो जयते की, जिन्होंने संघर्ष भरे जीवन से आगे बढ़ते हुए मेहनत, साहस और बिहान मिशन के सहयोग से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार किया और आज गाँव में एक सफल महिला उद्यमी के रूप में पहचानी जाती हैं।¶

श्रीमती पांचो जयते, पूजा ग्राम संगठन के अंतर्गत गायत्री स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। उन्होंने 15 अगस्त 2015 को स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन में बदलाव की शुरुआत की। समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वे और उनके पति गाँव में दूसरों के यहाँ मजदूरी करते थे, लेकिन मजदूरी से होने वाली आय से घर की जरूरतें पूरी करना भी कठिन हो जाता था। बच्चों की पढ़ाई और परिवार के बेहतर भविष्य की चिंता उन्हें हमेशा बनी रहती थी।

समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बिहान मिशन के माध्यम से आर्थिक गतिविधियाँ शुरू करने की प्रेरणा मिली। उनके पति को होटल व्यवसाय के बारे में जानकारी थी, इसलिए उन्होंने परिवार की आय बढ़ाने के लिए होटल व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। इसके लिए संकुल और ग्राम संगठन के माध्यम से उन्हें 1 लाख 76 हजार रुपए का ऋण प्राप्त हुआ। इस ऋण राशि से उन्होंने होटल के लिए आवश्यक सामग्री खरीदी और वर्ष 2018 में होटल आजीविका गतिविधि की शुरुआत की। शुरुआत में वे गाँव और आसपास के बाजारों में जाकर होटल की दुकान लगाने लगे। धीरे-धीरे लोगों को उनके बनाए भोजन की गुणवत्ता और स्वाद पसंद आने लगा और बाजार में उनकी दुकान की पहचान बनने लगी। ग्राहकों की बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। अब वे सप्ताह में चार अलग-अलग बाजारों में अपनी होटल की दुकान लगाते हैं। ग्राहकों की जरूरत के अनुसार उन्होंने अपने भोजन की गुणवत्ता और मात्रा में भी सुधार किया, जिससे उनकी आय में लगातार वृद्धि होने लगी। इस आय से अब वे अपने परिवार की जरूरतों को अच्छे से पूरा कर पा रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई में भी सहायता मिल रही है। इससे उनके आत्मविश्वास में भी काफी बढ़ोतरी हुई है।
होटल व्यवसाय के साथ-साथ उन्होंने आय के एक और स्रोत के रूप में मुर्गी पालन शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने 10 सोनाली मुर्गियों से मुर्गी पालन की शुरुआत की। धीरे-धीरे यह कार्य बढ़ता गया और आज वे लगभग 25 मुर्गियों का पालन कर उन्हें बाजार में बेचती हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। बिहान मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें आर.बी.के. के रूप में कार्य करने का अवसर भी मिला। इस कार्य के माध्यम से उन्हें समूह और ग्राम संगठन के दस्तावेजीकरण तथा वित्तीय प्रबंधन से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। प्रशिक्षण के बाद उन्हें 5 पंचायतों के 6 ग्राम संगठनों और लगभग 40 स्वयं सहायता समूहों की जिम्मेदारी दी गई। अब वे समूहों के दस्तावेजीकरण, लेखा-प्रशिक्षण, वित्तीय लेन-देन और ऑडिट कार्य को सफलतापूर्वक कर रही हैं। इस कार्य के लिए उन्हें संकुल स्तर से वार्षिक 24,000 रुपए तथा जिला स्तर से 32,400 रुपए की अतिरिक्त आय भी प्राप्त होती है।
वर्तमान में श्रीमती पांचो जयते के परिवार की आय के प्रमुख स्रोत होटल व्यवसाय, मुर्गी पालन, ईंट निर्माण कार्य और आर.बी.के. के रूप में मिलने वाला मानदेय हैं। इन सभी गतिविधियों से उनके परिवार की कुल वार्षिक आय लगभग 1 लाख 75 हजार रुपए तक पहुँच चुकी है। आज वे अपने परिवार के साथ सम्मानजनक जीवन जी रही हैं i

 

 

 

 

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