सुनील सक्सेना की रिपोर्ट
लखनऊ के अम्बर होटल में हुए भव्य राष्ट्रीय शिक्षा सारथी सम्मान समारोह में बाँदा जनपद के 9 शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट शैक्षिक कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। अखिल भारतीय साहित्यकार परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. पवन पुत्र बादल ने अपने संबोधन में शिक्षकों को प्रेरणा देते हुए कहा कि ‘आनंदघर’ की संकल्पना को पूरा करने के लिए अपनी समृद्ध भारतीय परंपराओं का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने भारतीय संस्कृति को प्रकृति का दोहन करने वाली संस्कृति बताया, न कि शोषण करने वाली।
और वही किसी कार्यक्रम के क्रम में होटल अंबर के इस कार्यक्रम सभागार में हमारे शिक्षा सारथी पुस्तक का भी अनावरण किया गया इस पुस्तक मे भी इन 9 शिक्षकों का कार्य उल्लेख किया गया है जिसमें सबसे सराहनीय कार्य नारायणी ब्लॉक की शिक्षा का दीप्ति राजपूत का वर्णन किया गया.
बाँदा जनपद से शिक्षिका दीप्ति राजपूत पुत्री सुभाष चंद्र राजपूत निवासी बाकरगंज शहर बांदा की निवासी हैं जो नरैनी ब्लॉक के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की शिक्षिका है दीप्ति राजपूत सहित बांदा के अन्य आठ शिक्षकों को भी राष्ट्रीय शिक्षा सारथी से सम्मानित किया गया शिक्षकों में रामकिशोर पाण्डेय, मीरा रविकुल, सविता देवी, इंसाफ अली, पवन कुमार तिवारी, चंद्रशेखर सेन, अर्चना गुप्ता, प्रदीप बाथम शामिल हैं। इन्हें राष्ट्रीय शिक्षा सारथी सम्मान और राष्ट्रीय आधार सेतु सम्मान से नवाज़ा गया।
शैक्षिक संवाद मंच उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित इस समारोह में ‘दिवस्वप्न–संवाद’, ‘फूले हैं पलाश वन’ और ‘हमारे शिक्षा सारथी’ नामक तीन पुस्तकों का विमोचन हुआ। मंच गिजुभाई बधेका के शैक्षिक दर्शन ‘विद्यालय बने आनंदघर’ पर आधारित शिक्षकों के क्षमता निर्माण के लिए प्रयासरत है। कार्यक्रम की अध्यक्षता संरक्षक रामकिशोर पांडेय ने की।
