अनिल सक्सेना की रिपोर्ट
*बांदा:।।-* योगी सरकार में प्रदेश की आधी आबादी को आर्थिक सुरक्षा का एक मजबूत कवच मिल रहा है। महिला सशक्तिकरण और स्वावलंबन के धरातल पर उतरने से बांदा जिले की बेटियां आत्मनिर्भर बनकर न सिर्फ अपना बल्कि प्रदेश का भविष्य भी चमका रही हैं। बांदा जिले के ग्रामीण इलाकों में घर-घर जाकर बिजली बिलों की वसूली कर रहीं ‘विद्युत सखियां’ आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल बनß चुकी हैं। बांदा जिले में वर्तमान में 112 विद्युत सखियां पूरी तरह आत्मनिर्भर होकर सम्मान की जिंदगी जी रही हैं और अपने परिवार का बड़ा सहारा है।
*10 से 12 हजार रुपये तक की हो रही आमदनी*
विद्युत सखी के रूप में काम कर रही बिसंडा क्षेत्र के कुर्रा खुर्द गांव की रहने वाली अंजू मौर्या ने सरकार की सराहना करते हुए बताया की साल 2021 में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से मैं विद्युत सखी बनी थी और 2022 से मैंने यह काम शुरू किया था। जहां उपभोक्ताओं से बकाया विद्युत बिल की वशूली करने में मुझे 2000 के विद्युत बिल पर 19 रुपये का कमीशन मिलता हैं। वहीं इससे अधिक बिल पर अधिक कमीशन मिलता है। इन्होंने बताया कि कुल बिल का लगभग 1 प्रतिशत कमीशन मुझे मिलता है। और महीने से लगभग 10 से 12 हजार रुपये मुझे मिल जाते हैं। जिससे मेरा परिवार का खर्च आसानी से चल जाता है।
*विद्युत विभाग व विद्युत उपभोक्ताओं को हो रहा लाभ*
योगी सरकार के इस प्रयास से जहां एक ओर ग्रामीण महिलाओं को घर के पास ही रोजगार मिल रहा है वहीं दूसरी ओर बिजली विभाग के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर हो रही इस वसूली से विभाग और उपभोक्ताओं दोनों को ही बड़ी राहत मिली है।
इस संबंध में बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता रवीकांत ने विद्युत सखियों की सराहना कार्टर हुए कहा कि विभाग को विद्युत सखियों से बहुत मदद मिल रही है। क्योंकि इनके द्वारा बकाया बिजली बिलों की वसूली की जाती है। जिससे उपभोक्ताओं के बकाया बिल आसानी से जमा हो जाते हैं और विभाग को इससे बहुत फायदा है। वहीं सबसे अच्छी बात यह है कि दूरदराज के जो उपभोक्ता है उनको भी इससे बहुत सहूलियत है, क्योंकि उनके घर के दरवाजे पर ही बिजली के बिल जमा हो जाते हैं और उन्हें विभाग के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।