ब्यूरो रिपोर्ट जालौन ( अभिवादन एक्सप्रेस)
जालौन। नगर पालिका परिषद जालौन में सार्वजनिक सुविधाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। नगर क्षेत्र में सार्वजनिक उपयोग के लिए लगाए गए दर्जनों प्लास्टिक मूत्रालयों की वर्तमान स्थिति को लेकर असमंजस बना हुआ है। ये मूत्रालय आखिर कहां गए और इन्हें हटाया गया तो किसके आदेश पर हटाया गया? इन सवालों का जवाब अब नगर पालिका प्रशासन से मांगा जा रहा है।
नगर क्षेत्र में सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त मूत्रालयों की व्यवस्था न होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाजारों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर आने वाले महिला-पुरुषों को मूलभूत सुविधाओं के अभाव में दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। कई स्थानों पर लोग खुले में पेशाब करने को मजबूर हैं, जिससे स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ईओ ने दूसरे अधिकारी से संपर्क करने को कहा
प्लास्टिक मूत्रालयों की स्थिति के संबंध में जब नगर पालिका परिषद जालौन के अधिशासी अधिकारी सुशील कुमार से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने अनुज कुमार से बात करने की सलाह दी। वहीं, संबंधित आरआई से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि नगर पालिका द्वारा लगाए गए मूत्रालय वर्तमान में कहां हैं और उनकी देखरेख की जिम्मेदारी किसके पास है।
सरकारी धन से खरीदे गए मूत्रालयों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग
यदि इन मूत्रालयों की खरीद नगर पालिका के बजट से की गई थी, तो उनकी खरीद, स्थापना और रखरखाव से संबंधित अभिलेखों की जांच जरूरी है। नगर पालिका को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कुल कितने प्लास्टिक मूत्रालय खरीदे गए थे, कितने स्थानों पर लगाए गए और वर्तमान में कितने उपयोग में हैं। यदि इन्हें हटाया गया है तो इसके पीछे क्या कारण थे और इन्हें कहां रखा गया है?
इन सवालों का जवाब सामने आने से न केवल नगर पालिका की संपत्ति की स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव की जिम्मेदारी भी तय हो सकेगी।
स्वच्छता के दावों के बीच सार्वजनिक सुविधाओं का सवाल
सरकार की ओर से स्वच्छता अभियान के तहत सार्वजनिक स्थानों पर साफ-सफाई और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है। ऐसे में जालौन नगर क्षेत्र में मूत्रालयों की उपलब्धता और उनकी वर्तमान स्थिति का मामला महत्वपूर्ण हो जाता है। विशेष रूप से महिलाओं के लिए सार्वजनिक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था होना जरूरी है, ताकि बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर आने-जाने के दौरान उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े।
जांच हुई तो सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति
अब सवाल यह है कि नगर पालिका प्रशासन इस मामले में जांच कराकर मूत्रालयों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा या नहीं। संबंधित अभिलेखों की जांच और मौके पर सत्यापन से यह पता लगाया जा सकता है कि मूत्रालय कहां लगाए गए थे, वर्तमान में कहां हैं और यदि हटाए गए हैं तो किसके निर्देश पर हटाए गए।
फिलहाल, मूत्रालयों के गायब होने की बात की स्वतंत्र पुष्टि और उनके संबंध में नगर पालिका प्रशासन का विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है। ऐसे में नगर पालिका प्रशासन से अपेक्षा है कि वह मामले की जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करे, ताकि जनता को सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं से राहत मिल सके।संपादकीय सुझाव: खबर प्रकाशित करने से पहले मूत्रालयों की खरीद संख्या, लागत और स्थापना स्थलों से संबंधित अभिलेख प्राप्त कर लें। इससे खबर अधिक तथ्यपरक होगी और जवाबदेही से जुड़े सवालों को मजबूती मिलेगी।