डॉ0 ओ0पी0 मिश्र
एक जमाना था जब वामपंथियों का एक नारा गूंजता था कमाने वाला ही खाएगा ।
फिर तत्कालीन जनसंघ और आज की भाजपा का एक नारा आया “कमाने वाला कमाएगा और खाने वाला खाएगा” वरना फिर बच्चा और बुढा क्या खाएगा ? भाजपा का यह नारा आज भी उसी तर्ज पर चल रहा है बस थोड़ा सा फर्क आया है कमाने वाला कमाएगा और लाभार्थी वर्ग खाएगा ।
क्योंकि भाजपा इसी वर्ग को अपना सॉलिड वोट बैंक मानकर रणनीति बना रही है। जैसा कि हम सब जानते हैं उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित है। अगर 2027 का यह चुनाव बीजेपी जीत कर सरकार बना लेती है तो यह योगी आदित्यनाथ की हैट्रिक होगी । यही वह कारण है जिसके चलते मुख्यमंत्री नित नई घोषणाएं कर रहे हैं उद्घाटन और शिलान्यास कर रहे हैं नियुक्ति पत्र बांट रहे हैं। इसके अलावा एक लाख रोजगार के महाभियोग विभिन्न समूह की मानदेय बढ़ोतरी और हर किसी को कैशलेस इलाज की सुविधा देकर नया लाभार्थी वर्ग तैयार किया जा रहा है। लाखों लोगों को सुरक्षा कवच देने के साथ ही मिशन 2027 के लिए वोट बढ़ाने पर पूरा फोकस है । शिक्षकों के एक बड़े समूह के लिए सरकार स्पेशल टैट परीक्षा करने जा रही है। सभी शिक्षकों व शिक्षणोत्तर कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की घोषणा सरकार पहले ही कर चुकी है एनएचएम डॉक्टर और सेवा बाड के तहत ग्रामीण क्षेत्र में तैनाती वाले डॉक्टरों का भी मानदेय बढ़ाने की तैयारी है । इसके अलावा वृद्धावस्था, निराश्रित और दिव्यांगजन पेंशन को 1000 रुपए से बढ़ाकर 1500 रुपए कर चुकी है। यह लाभार्थी समूह करीब सवा करोड़ लोगों का है इसके साथ ही जैसा कि हम सब जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में 15 करोड लोग मुफ्त योजना के दायरे में है। NFSA पोर्टल पर 3.64 करोड़ राशन कार्ड दर्ज हैं इनमें लगभग 40.81 लाख अंतोदय और 3.23 करोड़ पात्रगृहस्थी कार्ड हैं। जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार सरकार 65 लाख नए लाभार्थी को जोड़ना चाहती है ताकि जिसकी खाई उसकी बजाई का सपना साकार हो सके और लोग आंख बंद कर भाजपा को वोट दे सकें।
इसी के साथ अभी योगी सरकार चुनाव की घोषणा होते-होते महिलाओं को भी कम से कम तत्काल दस हजार रुपए की नगद धनराशि देने जा रही है महिलाओं को बताया जाएगा कि यह पहली किस्त है बाकी किस्त सरकार बनने के बाद मिलती रहेगी ।
अब यह अलग बात है कि बिहार , मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र में कुछ नए नियम कानून बनाकर आधे से अधिक महिलाओं की धनराशि को बंद कर दिया गया है । इसी तरह उत्तर प्रदेश में किसान सम्मान निधि के तहत 2.3 करोड़ किसान लाभार्थी हैं। 2026 में 23वीं किस्त के रूप में 4352 करोड़ 40 लाख रुपये बांटे गए थे। इतना ही नहीं 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों का मानदेय 9 हजार कर दिया गया है। करीब 28 हजार पीआरडी जवानों की ड्यूटी भत्ता 6 सौ कर दिया गया है।
इससे पहले मिड डे मील योजना से जुड़ी साढे तीन लाख से अधिक रसोइयों का मानदेय ₹3000 करने के साथ ही साथ कैशलेस इलाज की सुविधा भी सरकार दे चुकी है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 8000 से बढ़ाकर 9000 किए जाने की घोषणा की जा चुकी है। इनकी कुल संख्या करीब 3.30 लाख है इस तरह अगर सारा जोड़ घटाना लगाया जाए और सारा लाभार्थी वर्ग तथा सवर्ण समाज एक साथ जुड़ जाए तो भाजपा को कोई हरा नहीं सकता लेकिन यह भी तो नहीं है कि सारे लाभार्थी भाजपा को ही वोट देते हैं क्योंकि उत्तर प्रदेश जाति प्रधान राज्य है यहां चुनाव में जाति की भूमिका बहुत जबरदस्त होती है । इस समय उत्तर प्रदेश में 25 करोड़ से अधिक की आबादी है इनमें साढे आठ करोड़ के करीब पुरुष मतदाता तथा साढे सात करोड़ के करीब महिला मतदाता है यानी 25 करोड़ की आबादी में से लगभग 16 करोड़ मतदाता है। यह 16 करोड़ मतदाता अलग-अलग जातियों और धर्म के मानने वाले हैं। उत्तर प्रदेश के पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की संख्या करीब 45% है यही कारण है कि सारे राजनीतिक दल पिछड़े वर्ग को तरजीह देते हैं। जबकि सवर्ण समाज लगभग 28% है यानी करीब 4 करोड़ उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 20% है अब आप यह भी जान ले कि उत्तर प्रदेश पर इस समय कर्ज कितना है और इतनी चुनावी रेवड़िया बांटने के बाद कर्ज कितना होगा। उत्तर प्रदेश पर इस समय करीब 8 लाख करोड़ रुपए की देनदारियां हैं और यदि यह सारी योजनाएं लागू हो गई तो तकरीबन 10 लाख करोड़ का कर्जा हो जाएगा ।
तो क्या इससे विकास की योजनाएं प्रभावित नहीं होगी?
क्या आम आदमी के ऊपर टैक्स का बोझ नहीं बढ़ेगा? क्या हर छोटे बड़े से टैक्स नहीं लिया जाएगा।
यह तो वही हुआ कि हम कमाए, दिन रात मेहनत करें और तुम मस्ती मारो। इसके अलावा यदि लाभार्थी वर्ग जातियों में बट गया तो फिर क्या बीजेपी हैट्रिक बन पाएगी।