बृजेश उदैनियाँ की रिपोर्ट
जालौन। गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2027 के अवसर पर देश की विभिन्न जेलों में बंद 60 वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध, दिव्यांग, गंभीर रूप से बीमार एवं आर्थिक रूप से कमजोर महिला-पुरुष बंदियों को मानवीय आधार पर राहत दिए जाने की मांग उठाई गई है। बागवान समाज सेवा समिति के अध्यक्ष मुहम्मद अशफाक राइन ने इस संबंध में महामहिम राष्ट्रपति के नाम उप जिलाधिकारी जालौन के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि देश की विभिन्न जेलों में अनेक ऐसे बंदी हैं, जिनकी आयु 60 वर्ष से अधिक हो चुकी है। इनमें कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं तो कुछ शारीरिक कमजोरी अथवा दिव्यांगता के कारण चलने-फिरने तक में असमर्थ हैं। ऐसे पात्र बंदियों के मामलों पर मानवीय दृष्टिकोण से विचार किया जाना चाहिए।
गरीबी न्याय में न बने बाधा
समिति अध्यक्ष मुहम्मद अशफाक राइन ने कहा कि जेलों में बंद कई आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों के पास वकीलों की फीस देने तक के पैसे नहीं हैं। इसके चलते वे अपने मुकदमों की प्रभावी पैरवी नहीं कर पाते। ऐसे बंदियों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराते हुए उनके मामलों की निष्पक्ष एवं समयबद्ध समीक्षा कराई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीवन के अंतिम पड़ाव पर बुजुर्ग अपने परिवार, बच्चों और नाती-पोतों के साथ समय बिताना चाहते हैं। इसलिए गंभीर रूप से बीमार, दिव्यांग और असहाय बंदियों की परिस्थितियों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाना आवश्यक है।
26 जनवरी तक विशेष समीक्षा की मांग
ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से मांग की गई कि गणतंत्र दिवस 2027 को ध्यान में रखते हुए पात्र वृद्ध, दिव्यांग, बीमार एवं आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों के मामलों की विशेष समीक्षा कराई जाए। कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत पात्र पाए जाने वाले बंदियों को रिहाई अथवा अन्य उचित राहत देने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं।
समिति ने कहा कि कानून के समक्ष सभी नागरिकों को समान अवसर मिलना चाहिए और किसी व्यक्ति की आर्थिक कमजोरी न्याय प्राप्त करने में बाधा नहीं बननी चाहिए।
इस मांग का समर्थन करते हुए अशफाक राइन, ब्रजमोहन कुशवाहा, मु. शौकीन, जाकिर सिद्दीकी, अशोक चौधरी, मो अकरम और मु. राशिद समेत अन्य समाजसेवियों ने पात्र बंदियों को मानवीय आधार पर राहत दिए जाने की अपील की।