कयामपुर/नाहरगढ (तुलसीराम राठौर)–सभी साथियों
टीईटी के विषय में शिक्षकों के बीच किसी भी प्रकार की दुविधा या भ्रम नहीं रहना चाहिए। मध्य प्रदेश शिक्षक संघ की भूमिका बिल्कुल स्पष्ट है—
मध्य प्रदेश शिक्षक संघ टीईटी परीक्षा का समर्थक नहीं है।हमारा स्पष्ट मत है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को पुनः ऐसी परीक्षा की अनिवार्यता का सामना करना पड़ना एक गंभीर विषय है। लेकिन साथ ही हमें यह भी समझना होगा कि मध्य प्रदेश शिक्षक संघ एक अनुशासित, मान्यता प्राप्त एवं संवैधानिक व्यवस्था में विश्वास रखने वाला संगठन है। इसलिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का प्रत्यक्ष विरोध करना हमारी कार्यपद्धति नहीं है।
हमने टीईटी के संबंध में जो चरणबद्ध क्या-क्या किया उसको समझने का प्रयास करें।
टीईटी के विषय में हमारा संगठन केवल बयान देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि क्रमबद्ध और वैधानिक तरीके से लगातार प्रयास करता रहा है।
🔹 सर्वप्रथम अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री जी एवं महामहिम राष्ट्रपति जी के नाम ज्ञापन दिया गया।
🔹 इसके बाद मध्य प्रदेश शिक्षक संघ द्वारा प्रथम चरण में माननीय प्रधानमंत्री जी, महामहिम राष्ट्रपति जी एवं माननीय केंद्रीय शिक्षा मंत्री जी को ज्ञापन दिया गया।
🔹 दूसरे चरण में जिला स्तर पर माननीय सांसदों एवं विधायकों को ज्ञापन देकर शिक्षकों की समस्या से अवगत कराया गया।
🔹 इसके पश्चात मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी एवं माननीय शिक्षा मंत्री जी को भी ज्ञापन देकर प्रदेश के शिक्षकों को राहत देने की मांग की गई।
🔹 मध्य प्रदेश सरकार सहित विभिन्न पक्षों द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं, लेकिन अंततः न्यायिक स्तर पर अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी।
इसके बाद भी मध्य प्रदेश शिक्षक संघ ने प्रयास बंद नहीं किए। विक्रम शर्मा जिला अध्यक्ष मध्य प्रदेश शिक्षक संघ जिला शाखा मन्दसौर ने दी जानकारी।
जब यह स्पष्ट हुआ कि वर्तमान न्यायिक स्थिति में टीईटी की प्रक्रिया आगे बढ़नी है, तब मध्य प्रदेश शिक्षक संघ ने व्यावहारिक रूप से शिक्षक हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए माननीय मुख्यमंत्री जी, माननीय शिक्षा मंत्री जी एवं आयुक्त लोक शिक्षण से मांग की है कि—परीक्षा ऑफलाइन कराई जाए। परीक्षा यथासंभव ब्लॉक स्तर पर आयोजित की जाए।शिक्षकों को अनावश्यक यात्रा एवं आर्थिक परेशानी से बचाया जाए।
परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप TET प्राप्त करने की समय-सीमा 31 अगस्त 2028 तक रखी गई है। अब सबसे महत्वपूर्ण बात—संघ की वास्तविक भूमिका क्या है?
यह बात सभी शिक्षक साथियों को स्पष्ट रूप से समझनी चाहिए—
टीईटी का समर्थन करना और टीईटी से उत्पन्न परिस्थितियों में शिक्षक हित की रक्षा करना—दो अलग-अलग बातें हैं।
मध्य प्रदेश शिक्षक संघ टीईटी का समर्थन नहीं करता, लेकिन यदि वर्तमान वैधानिक एवं न्यायिक व्यवस्था के कारण परीक्षा देनी ही पड़ती है, तो हमारा संगठन यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करेगा कि किसी शिक्षक को अनावश्यक कठिनाई या सेवा-संबंधी नुकसान न हो।
इसीलिए हम मध्य प्रदेश सरकार से उन्हीं विषयों पर लगातार संवाद कर रहे हैं जो उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
*हमारी मांग केवल परीक्षा तक सीमित नहीं है हमारा उद्देश्य यह है कि—*
▪ किसी शिक्षक की सेवा प्रभावित न हो।
▪ नियुक्ति से चली आ रही वरिष्ठता सुरक्षित रहे।
▪ पदोन्नति के अवसरों पर अनावश्यक प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
▪ वेतन एवं अन्य सेवा लाभ सुरक्षित रहें।
▪ सेवानिवृत्ति संबंधी हितों की रक्षा हो।
▪ वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के साथ न्यायपूर्ण एवं मानवीय व्यवस्था हो।
टीईटी की मूल व्यवस्था RTE Act की धारा 23 और NCTE द्वारा निर्धारित न्यूनतम शिक्षक-योग्यता मानकों से जुड़ी हुई है। इसलिए राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाले विषयों पर राहत मांगना और व्यापक वैधानिक व्यवस्था में परिवर्तन के लिए केंद्र स्तर पर प्रयास करना—दोनों अलग-अलग स्तर के प्रयास हैं।
नई दिल्ली स्तर पर प्रयास लगातार जारी हैं
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के माध्यम से भारत सरकार, NCTE तथा संबंधित स्तरों पर भी शिक्षक हित में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
अर्थात हमारी लड़ाई एक स्तर पर नहीं, बल्कि हर वैधानिक स्तर पर जारी है।
प्रांतीय इकाई द्वारा प्रदेश के सभी जिला अध्यक्ष सचिव संभाग के अध्यक्ष सचिव की ऑनलाइन बैठक हुई सबसे अपने-अपने विचार लिए और अंत में संगठन अपनी दूरदर्शिता के आधार पर शिक्षकों के हित में निष्ठा से कार्य कर रहा है।
*साथियों, सबसे महत्वपूर्ण संदेश*
कृपया यह भ्रम न पालें कि—
“जो शिक्षक टीईटी की वर्तमान प्रक्रिया में व्यावहारिक व्यवस्था सुधारने की मांग कर रहा है, वह टीईटी का समर्थक हो गया।”
ऐसा बिल्कुल नहीं है।
हम टीईटी की अनिवार्यता के समर्थक नहीं हैं;
हम शिक्षक के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के समर्थक हैं।
यदि वर्तमान व्यवस्था में परीक्षा देनी पड़ती है तो शिक्षक को अनावश्यक कठिनाई से बचाना भी शिक्षक संगठन की जिम्मेदारी है और यदि वैधानिक स्तर पर राहत की कोई संभावना बनती है तो उसके लिए प्रयास करना भी हमारी जिम्मेदारी है।
हमारा संघर्ष TET से कहीं व्यापक है
*मध्य प्रदेश शिक्षक संघ का संघर्ष केवल टीईटी तक सीमित नहीं है।*
*हमारे प्रमुख मुद्दों में—*
👉 नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता
👉 पुरानी पेंशन
👉 ग्रेच्युटी
👉 पदोन्नति
👉 वेतन एवं सेवा सुरक्षा
👉 शिक्षकों के अन्य वैधानिक सेवा अधिकार
प्रमुख रूप से शामिल हैं और इन विषयों को हम संगठन के माध्यम से मजबूती से उठाते रहेंगे।
भ्रम नहीं—तथ्य समझें, संगठन पर विश्वास रखें
मध्य प्रदेश शिक्षक संघ राष्ट्रहित, शिक्षाहित, छात्रहित एवं शिक्षकहित को केंद्र में रखकर कार्य करने वाला संगठन है।
अलग-अलग संगठनों या व्यक्तियों द्वारा कही जा रही बातों के आधार पर भ्रमित होने के बजाय तथ्यों, न्यायिक स्थिति और संगठन द्वारा किए गए वास्तविक प्रयासों को समझना आवश्यक है।
*हमारा रास्ता स्पष्ट है—*
न्यायालय के निर्णय का सम्मान,
शिक्षक हित के लिए निरंतर संघर्ष,
जहाँ अधिकार है वहाँ राहत की मांग,
और जहाँ वैधानिक परिवर्तन आवश्यक है वहाँ उचित स्तर पर निरंतर प्रयास।
इसलिए साथियों, दुविधा छोड़िए, भ्रम से बचिए और शिक्षक हित में संगठित रहिए।
मध्य प्रदेश शिक्षक संघ का संकल्प—न राष्ट्रहित से समझौता, न शिक्षाहित से समझौता, न छात्रहित से समझौता और न शिक्षकहित से समझौता।