अनिल सक्सेना की रिपोर्ट
बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा के उद्यान महाविद्यालय के पुष्पविज्ञान एवं भू-दृश्य वास्तुकला विभाग तथा औषधीय एवं सुगंधित पौधों की अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (AICRP) के संयुक्त तत्वावधान में 11वें आयुर्वेद दिवस 2026 के अवसर पर “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” थीम पर वेबिनार का आयोजन किया गया।
वेबिनार का मुख्य विषय “औषधीय पौधे एवं आयुर्वेद: पारंपरिक ज्ञान, वैज्ञानिक प्रमाणीकरण एवं भविष्य की संभावनाएँ” रहा। कार्यक्रम केमुख्य अतिथि डॉ. जगन्नाथ पाठक, निदेशक अनुसंधानने अपने संबोधन में आयुर्वेद में औषधीय पौधों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान एवं आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के समन्वय से औषधीय पौधों की उपयोगिता एवं संभावनाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने औषधीय पौधों के संरक्षण, वैज्ञानिक उत्पादन तथा गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री के विकास की आवश्यकता पर भी बल दिया।
कार्यक्रम केविशिष्ट अतिथि एवं अतिथि सम्मानित डॉ. एस. वी. द्विवेदी, अधिष्ठाता, उद्यान महाविद्यालयने आयुर्वेद एवं औषधीय पौधों के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को औषधीय एवं सुगंधित पौधों के क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि औषधीय पौधे स्वास्थ्य, कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम के प्रारंभ मेंडॉ. अजय कुमार सिंह, विभागाध्यक्ष, पुष्पविज्ञान एवं भू-दृश्य वास्तुकला विभागने सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
डॉ. के. एस. तोमर, सहायक प्राध्यापक एवं कार्यक्रम समन्वयक ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों की जानकारी प्रतिभागियों को प्रदान की। उन्होंने बताया कि औषधीय पौधों के पारंपरिक उपयोग को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना तथा विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को इस क्षेत्र में नवीन अनुसंधान के लिए प्रेरित करना कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है।
वेबिनार केमुख्य वक्ता डॉ. आर. के. श्रीवास्तव, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रोफेसर (AcSIR), CSIR-CIMAP, लखनऊने “औषधीय पौधे एवं आयुर्वेद: पारंपरिक ज्ञान, वैज्ञानिक प्रमाणीकरण एवं भविष्य की संभावनाएँ” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने औषधीय पौधों की विविधता, आयुर्वेद में उनके पारंपरिक उपयोग, सक्रिय जैव-सक्रिय घटकों, वैज्ञानिक प्रमाणीकरण तथा औषधीय एवं सुगंधित पौधों के क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक विधियों के माध्यम से प्रमाणित कर औषधीय पौधों के उपयोग एवं मूल्य संवर्धन को नई दिशा दी जा सकती है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों केविद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों सहित 100 से अधिक प्रतिभागियोंने ऑनलाइन जुड़कर व्याख्यान का लाभ उठाया। प्रतिभागियों ने औषधीय पौधों, आयुर्वेद, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा इनके भविष्य से संबंधित विषयों पर विशेष रुचि प्रदर्शित की।
कार्यक्रम के अंतर्गत 100 सेअधिक प्रतिभागियों को औषधीय पौधों कीपहचान, उपयोग, उत्पादन एवं संरक्षण से संबंधित व्यावहारिक जानकारी के साथ क्षेत्रीय भ्रमण (Field Exposure) काअवसर भी प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. अमित कनौजिया ने सभी अतिथियों, मुख्य वक्ता, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन आयुर्वेद एवं औषधीय पौधों के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान, संरक्षण, संवर्धन एवं जन-जागरूकता को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ हुआ।