*बाँदा पेट्रोलियम डीलर्स एसोसियेशन ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन*

 

अनिल सक्सेना की रिपोर्ट

जिला पंचायत, बाँदा द्वारा जनपद के पेट्रोल-डीजल प्रतिष्ठानों को जारी किए गए नोटिस का किया विरोध

आपसे सादर निवेदन करना है, कि पिछले कुछ समय से जिला पंचायत द्वारा जनपद के अनेक पेट्रोल-डीजल पम्प की फर्म्स को विभव एवं सम्पत्ति कर तथा लाइसेंस शुल्क से सम्बन्धित नोटिसें जारी की गई हैं।
इस सम्बन्ध में हम बाँदा पेट्रोलियम डीलर्स एसोसियेशन की ओर से निम्नलिखित निवेदन करना चाहते हैं :-
यहकि सन्दर्भित नोटिसों में विभव एवं सम्पत्ति कर का आंकलन किसी सुसंगत एवं पारदर्शी प्रणाली को अपनाये बिना एकतरफा आरोपित किया गया है।
यहकि विभव एवं सम्पत्ति कर के आंकलन के बाद अनिवार्य सुनवाई (ज्ञापन) का अवसर सम्बन्धित को नहीं दिया गया है, जो इस सम्बन्ध में आवश्यक प्रक्रिया है। (देखे विभव एवं सम्पत्ति कर आरोपित करने की शर्त एवं निबंधन की धारा-121) संलग्नक-1
यहकि विभव एंव सम्पत्ति कर की धारा 124 के अनुसार व्यावसायिक को नोटिस के सन्दर्भ में लिखित आपत्ति का अधिकार होगा, किन्तु सम्बन्धित फर्म्स से आपत्तियाँ प्राप्त नहीं की गई हैं। संलग्नक-2
यहकि उपरोक्त के सम्बन्ध में प्राप्त आपत्तियों को राज्य सरकार को भी भेजा जाना अपेक्षित है, इस प्रक्रिया की पूर्ति भी नहीं की गई है।
माननीय उच्च न्यायालय इलाहबाद ने वाद संख्या 35981 वर्ष 2024 जुबैर कुरैशी बनाम स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश में स्पष्ट आदेश दिया है, कि जिला पंचायत अधिनियम 1961 के अंतर्गत जिला पंचायत को लाइसेंस फीस, भू राजस्व की भांति RC जारी करके वसूलने का अधिकार नहीं है।
यहकि जिला पंचायत अपने कार्य / अधिकार क्षेत्र से अलग नगर निकाय क्षेत्र में स्थापित आउटलेट्स में भी नोटिस / वसूली भेज रहा है, ऐसे कई प्रकरण आए हैं। चूँकि जिला पंचायत का विधिक अधिकार क्षेत्र केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित है, अतः नगर निकाय क्षेत्र के भीतर आने वाले प्रतिष्ठानों पर जिला पंचायत द्वारा की जा रही यह कार्रवाई पूरी तरह से क्षेत्राधिकार का उल्लंघन है।
यहकि पेट्रोलियम प्रतिष्ठानों की लाइसेंस प्रक्रिया ‘पेट्रोलियम रूल्स 2002’ द्वारा स्पष्ट रूप से निर्देशित है (देखें अनुलग्नक-3)। इसे किसी अन्य प्रकार से आच्छादित किया जाना अनावश्यक है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट करना है, कि उ.प्र शासन के नवीनतम आदेश में जिन 4 विभागों से NOC लेना है उसमें अब जिला पंचायत नहीं है, जबकि पूर्व में शामिल था।
श्रीमान् जी,
पेट्रोलियम प्रतिष्ठान ‘डिस्पेंसिंग पम्प एण्ड सेलिंग लाइसेंस’ (DPSL) के अनुदेशों के तहत जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा जारी लाइसेंस और मान्नीय जिलाधिकारी द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के बाद ही संचालित है तथा यह प्रायः भारत सरकार की कम्पनियों के रिटेल आउटलेट हैं। इस प्रतिष्ठानों में बिना किसी न्याय संगत आंकलन के कोई अन्य लाइसेंस फीस स्थापित किया जाना उचित नहीं है।
उपरोक्त आलोक में आपसे प्रार्थना है, कि जिला पंचायत द्वारा आरोपित इस प्रकार की विभव एवं सम्पत्ति कर तथा लाइसेंस फीस की नोटिसों / आर सी पर रोक लगाने की कृपा करेंगे।

व

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