गया जी से राजेश कुमार मिश्रा की रिपोर्ट
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन एवं धार्मिक स्थल बोधगया में पितृपक्ष मेले के दौरान जिला प्रशासन और नगर परिषद के तमाम दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। देश-विदेश से अपने पूर्वजों का पिंडदान करने पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं के लिए बोधगया में बदइंतजामी सबसे बड़ा कष्टदायक कारण बन चुकी है।
*धरातल पर दावों की खुली पोल, सुरक्षा व्यवस्था राम भरोसे*
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त बोधगया में प्रशासनिक व्यवस्था सही नहीं होने के कारण अराजकता की स्थिति बनी हुई है। मेले के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से दूर-दराज और विदेश से आए पिंडदानियों के मोबाइल और पैसे छिनैती की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
गया के जिलाधिकारी (DM) द्वारा व्यवस्था को लेकर लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि पूरी प्रशासनिक मशीनरी का ध्यान केवल विष्णुपद मंदिर क्षेत्र को चमकाने पर केंद्रित है, जबकि बोधगया की समस्याओं को शायद वे भूल चुके हैं या बैठकों में शामिल अधिकारियों ने उन्हें इसकी याद दिलाने की जहमत नहीं उठाई।
*जर्जर सड़कें और रात के स्टॉलों का ‘रियल्टी चेक’*
बोधगया की कई प्रमुख सड़कें अभी भी बदहाल और जर्जर स्थिति में हैं, जहां ऑटो चालकों का चलना तक दूभर हो चुका है। इसके अतिरिक्त, रात के समय व्यवस्था का ‘चकाचौंध’ नजारा पेश करने के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर कई जगह सरकारी स्टॉल तो लगा दिए गए हैं, लेकिन इन स्टॉलों की वास्तविक स्थिति काफी दयनीय है। प्रशासनिक निष्ठा और छवि बेहतर करने के उद्देश्य से की गई यह पहल आज खुद प्रशासन की पोल खोल रही है। यदि अधिकारी रात में खुद निकलकर इन स्टॉलों का निरीक्षण करें, तो हकीकत सामने आ जाएगी।
इस स्थिति ने बोधगया नगर परिषद के अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय कुमार मांझी एवं भाजपा पूर्वी जिलाध्यक्ष जैसे स्थानीय प्रतिनिधियों और प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
*नगर परिषद प्रतिनिधि ने सफाई में क्या कहा?*
इन तमाम प्रशासनिक विफलताओं और सवालों के बीच बोधगया नगर परिषद के अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय कुमार मांझी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
”यहाँ पर जो पितृपक्ष मेला आयोजित होता है, उसमें देश-विदेश और हर कोने से जो तीर्थयात्री आते हैं, उनकी सुविधा के लिए हम लोग प्रतिवर्ष यहाँ पर सेवा शिविर लगाते हैं। इस शिविर में स्वास्थ्य शिविर, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, उनके विश्राम और आवासन (रुकने) की व्यवस्था, तथा पूछताछ केंद्र जैसी तमाम सुविधाएँ दी जाती हैं। इसके साथ ही, यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा या परेशानी न हो, इसके लिए हमारे कार्यकर्ता लगातार तत्पर रहते हैं और चौबीसों घंटे उनकी सेवा में समर्पित रहते हैं।”
जहां एक तरफ स्थानीय प्रतिनिधि सेवा शिविर और २४ घंटे मुस्तैदी का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर धरातल पर उखड़ी सड़कें, बढ़ती छिनैती और बदहाल स्टॉल प्रशासन की बैठकों और दावों पर भारी पड़ते दिख रहे हैं।