रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उनका लाभ समय पर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और उसका प्रभाव धरातल पर स्पष्ट दिखाई दे। उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब अथवा लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। पारस (Project Assessment, Review and Analysis System) पोर्टल के माध्यम से योजनाओं एवं विकास कार्यों की नियमित निगरानी के साथ विभागों और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं की समय रहते पहचान कर उनका त्वरित समाधान किया जा सके। मुख्यमंत्री श्री साय आज मंत्रालय महानदी भवन में पारस पोर्टल के माध्यम से आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विभिन्न विभागों की प्रमुख योजनाओं, अधोसंरचना परियोजनाओं और जनसेवाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। मुख्यमंत्री श्री साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला कलेक्टरों से योजनाओं की जमीनी स्थिति की जानकारी ली तथा निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में प्राप्त करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शासन की कार्यप्रणाली में अंतर्विभागीय समन्वय की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। अनेक विकास परियोजनाओं में एक से अधिक विभागों की अनुमति, सहभागिता अथवा सहयोग आवश्यक होता है। ऐसे में विभाग अलग-अलग स्तर पर कार्य करने के बजाय समन्वित दृष्टिकोण अपनाएं। इससे परियोजनाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी, अनावश्यक विलंब दूर होगा तथा समय और लागत दोनों की बचत होगी।
उन्होंने कहा कि पारस पोर्टल का उद्देश्य केवल योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना नहीं, बल्कि उन कारणों की पहचान कर समाधान सुनिश्चित करना भी है, जिनके कारण कोई परियोजना या योजना अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है। राज्य स्तर से लेकर जिलों तक सभी अधिकारी इसे परिणाम आधारित प्रशासन के प्रभावी माध्यम के रूप में उपयोग करें।
एग्रीस्टैक में कोई भी पात्र किसान पंजीयन से न रहे वंचित
मुख्यमंत्री श्री साय ने एग्रीस्टैक में प्रत्येक पात्र किसान का शत-प्रतिशत पंजीयन निर्धारित समय-सीमा में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि एग्रीस्टैक को केवल धान खरीदी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यह किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं और सेवाओं का लाभ अधिक सरलता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण आधारभूत व्यवस्था है।
मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि जिलों में विशेष अभियान चलाकर एग्रीस्टैक तथा डीसीएस से संबंधित लंबित कार्यों को प्राथमिकता से पूरा किया जाए। प्रत्येक वास्तविक किसान का पंजीयन सुनिश्चित हो और किसी पात्र किसान को धान विक्रय अथवा शासन की अन्य योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में परेशानी न हो।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष व्यवस्था के प्रारंभिक चरण में सामने आई व्यावहारिक कठिनाइयों से सीख लेते हुए इस वर्ष पहले से ही सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं। किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी की लापरवाही के कारण यदि कोई पात्र किसान लाभ से वंचित होता है तो उसकी जवाबदेही तय की जाए।
मुख्यमंत्री ने डिजिटल फसल सर्वेक्षण की जिलेवार प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने अपेक्षाकृत पीछे चल रहे जिलों को निर्धारित समय-सीमा में सर्वेक्षण पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि इस कार्य में लापरवाही अथवा अपेक्षित सहयोग नहीं करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
ग्राम पंचायतों में आधारभूत अधोसंरचना को मिले प्राथमिकता
मुख्यमंत्री श्री साय ने विकसित भारत जी-रामजी योजना की समीक्षा करते हुए ग्राम पंचायतों में आधारभूत अधोसंरचना से जुड़े आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुरूप ग्राम पंचायतों में आवश्यक आधारभूत विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने इस दिशा में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि गांवों में बुनियादी अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण ग्रामीण अर्थव्यवस्था और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने स्वीकृत कार्यों को गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।
सेवा सेतु और सीएम हेल्पलाइन में समयबद्ध हो शिकायतों का निराकरण
मुख्यमंत्री श्री साय ने सेवा सेतु और सीएम हेल्पलाइन से संबंधित प्रकरणों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि नागरिकों की समस्याओं, शिकायतों और आवेदनों का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुशासन की महत्वपूर्ण कसौटी है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लोगों को छोटी-छोटी सेवाओं और समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। सेवा सेतु और सीएम हेल्पलाइन पर प्राप्त प्रत्येक प्रकरण की गंभीरता से समीक्षा हो तथा उसका समयबद्ध एवं संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का उपयोग केवल प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इससे आम नागरिक के लिए शासन तक पहुंच आसान हो और उसकी समस्या के समाधान में लगने वाला समय कम हो।
योजनाएं कागजों तक सीमित न रहें, धरातल पर दिखे परिणाम
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पारस पोर्टल प्रदेश में अधोसंरचना निर्माण, विकास कार्यों तथा प्रमुख योजनाओं की प्रभावी निगरानी का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। जिलों में विभिन्न विभागों के अधिकारी आपसी समन्वय से कार्य करें तथा ऐसी समस्याएं, जिनका समाधान राज्य स्तर से अपेक्षित है, उन्हें समय रहते सामने लाएं।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक माह के अंतिम मंगलवार को पारस पोर्टल के माध्यम से राज्य स्तर पर प्रमुख योजनाओं, विकास कार्यों और जनसेवाओं की नियमित समीक्षा की जा रही है। इसका उद्देश्य केवल प्रगति की जानकारी लेना नहीं, बल्कि बाधाओं का समाधान कर योजनाओं के क्रियान्वयन में गति लाना और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की स्पष्ट प्राथमिकता है कि जनकल्याणकारी योजनाएं केवल कागजों और आंकड़ों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका प्रभाव धरातल पर दिखाई दे। प्रत्येक पात्र व्यक्ति को योजनाओं का लाभ समय पर मिले और स्वीकृत विकास कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरे हों। पारस पोर्टल के माध्यम से राज्य शासन, विभागों और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर इसी परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति को मजबूत किया जा रहा है।
बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील, अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, राजस्व विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।