बृजेश उदैनियाँ की रिपोर्ट
0-वाह रे कार्यवाही जिसकी शिकायत, उसी सचिव को सौंपी जांच;
0-10 दिन बाद भी नहीं मिली पात्र-अपात्र लाभार्थियों की सूची
जालौन। विकासखंड जालौन की ग्राम पंचायत सालाबाद में प्रधानमंत्री आवास योजना के 47 लाभार्थियों को लेकर की गई शिकायत के बाद जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी और खंड विकास अधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर योजना में कथित अनियमितताओं की जांच कराने, अपात्र लोगों के नाम सूची से हटाने तथा मजिस्ट्रेट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार प्रार्थना पत्र दिए जाने के करीब डेढ़ माह बाद ग्राम पंचायत सचिव साधना राठौर द्वारा गांव में जांच की गई। आरोप है कि जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं को इसकी जानकारी नहीं दी गई। बाद में उन्हें जानकारी हुई कि उनके घरों की भी जांच की गई, जबकि उनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की लाभार्थी सूची में शामिल नहीं था।
शिकायतकर्ताओं का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ आवास योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायत की गई, जांच भी उसी सचिव के स्तर से करा दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि जब शिकायत ही सचिव की कार्यप्रणाली को लेकर है तो उसी अधिकारी से जांच कराए जाने से जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान सचिव के साथ ऐसे लोग भी मौजूद रहे, जिनके नाम नियमों को दरकिनार कर पात्रता सूची में शामिल किए जाने की शिकायत की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जानी है तो शिकायत से जुड़े पक्षों से अलग किसी सक्षम अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
वहीं शिकायतकर्ताओं के मुताबिक उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र एवं अपात्र लाभार्थियों की सूची उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन करीब 10 दिन बीत जाने के बाद भी सूची उपलब्ध नहीं कराई गई। उनका आरोप है कि सूची मांगने पर लगातार टालमटोल की जा रही है।
मामले में एक और सवाल तब खड़ा हुआ जब शिकायतकर्ताओं के अनुसार जांच प्रक्रिया के दौरान ही कुछ लाभार्थियों के खातों में आवास योजना की धनराशि पहुंचने लगी। शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब लाभार्थियों की पात्रता को लेकर शिकायत और जांच चल रही थी, तो भुगतान की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई गई।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच ग्राम पंचायत सचिव से हटाकर किसी अन्य सक्षम एवं निष्पक्ष अधिकारी अथवा मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी से कराई जाए। साथ ही लाभार्थियों की पात्रता, मौके पर हुई जांच, पात्र-अपात्र सूची तथा खातों में भेजी गई धनराशि की पूरी प्रक्रिया की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।