बृजेश उदैनियाँ की रिपोर्ट
जालौन। रनवां गांव से कोरीपुरा को जोड़ने के लिए मलंगा नाला पर करीब 26 लाख रुपए की लागत से बनाया गया रपटा पुल पहली बारिश में ही क्षतिग्रस्त हो गया। पुल के दोनों ओर मिट्टी बह जाने से रास्ता बदहाल हो गया है, जबकि रपटा के कई हिस्सों में टूट-फूट साफ दिखाई दे रही है। इससे ग्रामीणों को आवागमन के दौरान हादसे का डर बना हुआ है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने और गुणवत्ता में कमी मिलने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई के साथ धनराशि की रिकवरी की मांग की है।
ब्लॉक क्षेत्र के रनवां गांव से कोरीपुरा की दूरी करीब एक किलोमीटर है। दोनों गांवों के बीच मलंगा नाला होने के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानी होती थी। इसी समस्या को देखते हुए करीब एक वर्ष पहले रनवां गांव के आगे मलंगा नाला पर रपटा पुल का निर्माण कराया गया था। ठेकेदार रजनीकांत कुशवाहा द्वारा करीब 26 लाख रुपए की लागत से बनाए गए रपटा से ग्रामीणों को आवागमन सुगम होने की उम्मीद थी।
ग्रामीणों रामकरन प्रजापति, तीरथराम, पर्वत सिंह कुशवाहा, रहीश खान, कलू प्रजापति, मानसिंह कुशवाहा, बरनाम सिंह, राजा भइया, दशरथ कुशवाहा, आकाश, मुनेश, वीर प्रताप, रमाकांत और पप्पू प्रजापति आदि का आरोप है कि निर्माण के दौरान ही काम की गुणवत्ता को लेकर आपत्ति जताई गई थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों के मुताबिक रपटा के दोनों ओर की मिट्टी की भराई भी पर्याप्त रूप से मजबूत नहीं की गई।
हाल में हुई बारिश के बाद पानी के ओवरफ्लो से रपटा के आसपास की मिट्टी बह गई और कई जगह गहरे कटाव हो गए। वहीं पुल का स्लैब भी क्षतिग्रस्त हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि जिस रपटा को लंबे समय तक दोनों गांवों के बीच आवागमन का माध्यम बनना था, वह पहली बारिश में ही क्षतिग्रस्त हो गया। इससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने डीएम समीर से मांग की है कि रपटा निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, नींव, स्लैब और दोनों ओर की मिट्टी की भराई समेत पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए। जांच में यदि मानकों की अनदेखी या निर्माण में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार से धनराशि की रिकवरी कराई जाए और रपटा को मानकों के अनुरूप दुरुस्त कराया जाए।
*पानी कम होने पर करा देंगे मरम्मत*
ठेकेदार रजनीकांत ने बताया कि जहां रपटा क्षतिग्रस्त हुआ है, वहां पानी कम होने के बाद मरम्मत करा दी जाएगी।
*स्कूली बच्चों और किसानों का आवागमन प्रभावित*
किसान रामकरन सिंह प्रजापति ने बताया कि रपटा क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। रनवां और कोरीपुरा के लोगों के साथ स्कूली बच्चे भी इसी रास्ते से आते-जाते हैं। दोनों गांवों के आसपास खेत होने के कारण किसान और मजदूर भी रोज इसी रास्ते से खेतों तक पहुंचते हैं। ट्रैक्टर, बाइक और अन्य छोटे वाहन भी इसी मार्ग से निकलते हैं, लेकिन रपटा क्षतिग्रस्त होने के बाद हादसे का खतरा बना हुआ है।
*फसल के नुकसान का पूरा मुआवजा न मिलने का आरोप*
रनवां निवासी महिला किसान शीतला देवी ने बताया कि रपटा निर्माण के दौरान ठेकेदार ने उनके खेत में खड़ी गेहूं की फसल के बीच निर्माण सामग्री रख दी थी। इससे करीब तीन बीघा फसल प्रभावित हुई। उनके मुताबिक ठेकेदार ने नुकसान के बदले 16 हजार रुपए दिए, जबकि उनका करीब 40 से 50 हजार रुपए का नुकसान हुआ था। बाकी राशि मांगने पर भुगतान नहीं किया गया।
*3-4 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा*
ग्रामीण युवा आकाश ने बताया कि रनवां और कोरीपुरा के बीच दूरी करीब एक किलोमीटर है, लेकिन रपटा खराब होने के बाद दूसरी ओर जाने के लिए ग्रामीणों को करीब 3 से 4 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे किसानों का समय और डीजल दोनों खर्च हो रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए क्षतिग्रस्त रपटा पार करना भी जोखिम भरा बना हुआ है।