सती व ध्रुव चरित्र का वर्णन सुन मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु *भगवान खाटू श्याम की सुंदर झांकी सजाई गई

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कौशल किशोर विश्वकर्मा की रिपोर्ट

तिंदवारी(बाँदा)।कस्बे के रामलीला मैदान में लखेरा परिवार के द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सती चरित्र ,ध्रुव चरित्र का सुंदर वर्णन सुनकर व खाटू श्याम की सुंदर झांकी देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा में भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने बढ़चढ़ करके हिस्सा लिया व कथा में सती चरित्र, ध्रुव चरित्र का वर्णन को सुनकर खूब आनंद लिया। श्रीमद्भागवत कथा के कथावाचक पंडित मारुतिनंदन जी महाराज ने अपनी मधुर वाणी से कथा के तीसरे दिन सती चरित्र, भक्त ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि राजा उत्तानपाद की सुनीति और सुरुचि नामक दो भार्याएं थीं। राजा उत्तानपाद के सुनीति से ध्रुव तथा सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र हुए। सुनीति बड़ी रानी थी, पर राजा उत्तानपाद का प्रेम सुरुचि के प्रति अधिक था। एक बार राजा उत्तानपाद ध्रुव को गोद में लिए बैठे थे, तभी छोटी रानी सुरुचि वहां आई। अपने सौत के पुत्र ध्रुव को राजा की गोद में बैठे देख कर वह ईर्ष्या से जल उठी। झपटकर उसने ध्रुव को राजा की गोद से खींच लिया और अपने पुत्र उत्तम को उनकी गोद में बिठाते हुए कहा, रे मूर्ख! राजा की गोद में वही बालक बैठ सकता है, जो मेरी कोख से उत्पन्न हुआ है। तू मेरी कोख से उत्पन्न नहीं हुआ है। तुझे इनकी गोद में तथा राजसिंहासन पर बैठने का अधिकार नहीं है। यदि तेरी इच्छा राज सिंहासन प्राप्त करने की है तो भगवान नारायण का भजन कर। उनकी कृपा से जब तू मेरे गर्भ से उत्पन्न होगा तभी राजपद को प्राप्त कर सकेगा। बालक ध्रुव अल्पकाल में ही उसकी तपस्या से भगवान नारायण उनसे प्रसन्न होकर उसे दर्शन देकर कहा, हे राजकुमार! मैं तेरे अन्तःकरण की बात को जानता हूं। तेरी सभी इच्छाएं पूर्ण होंगी। समस्त प्रकार के सर्वोत्तम ऐश्वर्य भोग कर अंत समय में तू मेरे लोक को प्राप्त करेगा, इसलिए हमें समझना चाहिए नाम जप व दृढ संकल्प से ईश्वर शीघ्र प्रसन्न होकर हमारा कल्याण करते हैं। वही कथा में भगवान खाटू श्याम की झांकी सजाई गई जंहा भक्त मंत्रमुग्ध हो गए।
इस अवसर पर कथा परीक्षित लोटन प्रसाद,बिंदी देवी सहित अनिल लखेरा, सुनील लखेरा,सुशील, शंकर,मुन्ना तथा भारी संख्या में महिला श्रोताओं सहित पुरूष भक्त उपस्थित रहे।

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