*बाँदा में विशाल जोन स्तरीय निरंकारी बाल समागम सम्पन्न बच्चों ने दिया सन्देश जीवन में परमात्मा जरूरी है*

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अनिल सक्सेना की रिपोर्ट

बाँदा- 12 जुलाई-2026, दिन रविवार को सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की प्रेरणा से संत निरंकारी सत्संग भवन, शास्त्री नगर, बाँदा में जोन स्तरीय विशाल निरंकारी बाल संत समागम का आयोजन प्रयागराज से पधारे श्री मिथिलेश कुमार जी (केन्द्रीय ज्ञान प्रचारक) जी की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। जिसमें बाँदा शहर के अलावा झाँसी, हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट, नरैनी, अतर्रा, बबेरू, मुरवल, मौदहा, बिवांर, कमासिन आदि ब्रॉन्चो से सैकड़ों निरंकारी बच्चों ने गीत, नाटक, कविता, विचार, कव्वाली आदि प्रेरक प्रस्तुतियों के माध्यम से सेवा, सत्संग, सुमिरन का महत्व जीवन में उतारने की प्रेरणा दी।
संत श्री मिथिलेश कुमार जी ने बांदा जोन के सभी ब्रॉन्चो से आये हुये सभी बच्चों की प्रस्तुतियों का उत्साह वर्धन करते हुए साध संगत को संबोधित करते हुए कहा कि बिनु सत्संग विवेक न होई, राम कृपा बिनु सुलभ न सोई। अर्थात बच्चे जब सत्संग मेें आते हैं तो बच्चों में विवेक जागृत होता है, जिससे बच्चे माता-पिता का सम्मान करते हैं, क्रोध नहीं करते हैं और आपस में झगड़ते नहीं हैं एवं सत्संग में आने से बच्चों में सकारात्मक विचारों का जन्म होता है जिससे बच्चें जहां शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हैं, वहीं दूसरी ओर आध्यत्मिक क्षेत्र में भी आगे बढ़ते हैं।
आगे कहा कि एक बच्चा अपने माता-पिता से कहता है कि सत्संग में जाकर हमने सीखा है कि जब भी हम आपस में बात करें तो बात करते समय ‘‘जी’’ शब्द का प्रयोग करें, जिससे हम आपस में झगड़ते नहीं हैं।
आगे फरमाया कि जब माता-पिता सत्संग में आयेगें तो माता-पिता को देखकर ही बच्चे सत्संग में आयेगें। सत्संग में आने वाले बच्चें अपने आप संस्कारवान बनेगें। आज इंटरनेट की दुनिया में जहां बच्चा दिशाहीन हो रहा है, वहीं सत्संगी बच्चा संस्कारवान हो रहा है।
अन्त में कहा कि बच्चे राष्ट्र के सच्चे नागरिक भी बने, लेकिन ऐसी शिक्षा आध्यात्मिक सत्संग के माध्यम से ही मिलती है एवं बच्चो में एक अच्छे संस्कार मिले, वो संस्कार सत्संग से ही बच्चों को मिलते है, इसलिए संत निरंकारी मिशन प्रत्येक वर्ष पूरे भारतवर्ष में निरंकारी भवनों में ये बाल समागम आयोजित करता है।
बाल संगत के बच्चों ने गीत केे माध्यम से संदेश दिया कि परमात्मा दुनिया का मालिक एवं सृष्टि का पालक है।
कविता के माध्यम से इंसान को संदेश दिया कि कौन है तू, और कहां से आया है। नाटक के माध्यम से बच्चों ने संदेश दिया कि सुबह के सत्संग से विचारों को जहां सही दिशा मिलती है, तो वहीं शाम के सत्संग से पूरे दिन का मन शांत हो जाता है।
समागम में होने वाली समस्त सेवाएँ क्षेत्रीय संचालक, डॉ0 सुरेश सिंह जी एवं सेवादल कार्यकर्ताओं के सहयोग से सम्पन्न हुईं।
बाँदा जोन के जोनल इंचार्ज श्री कन्हैयालाल जी एवं श्रीमती राखी जी, श्रीमती मंजूलता रायकवार जी ने बच्चों को बधाई देते हुए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन बहन वंदिता जी एवं बहन भूमि जी ने किया। समागम में भाग लेने वाले बच्चों को पुरस्कार वितरण भी मंच से किया गया एवं श्रद्धालु भक्तों ने लंगर प्रसाद ग्रहण किया। यह कार्यक्रम प्रातः 8.00 बजे से 11.00 बजे तक चला।

 

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