सनत कुमार बुधौलिया
कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), जालौन के परिसर में आज गर्भवती महिलाओं, धात्री (स्तनपान कराने वाली) माताओं के बेहतर पोषण प्रबंधन और क्षेत्र को कुपोषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर पोषण के प्रति जागरूकता फैलाना और कुपोषण के खिलाफ जंग को मजबूत करना था। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की मुख्य आयोजक एवं कृषि विज्ञान केंद्र, जालौन की गृह वैज्ञानिक डॉ. राजकुमारी रहीं। कार्यक्रम में क्षेत्र की 25 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पोषण की जमीनी रीढ़ हैं।
मुख्य बिंदु एवं प्रशिक्षण के मुख्य अंश:
* गर्भवती महिलाओं के लिए पोषण: डॉ. राजकुमारी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को सामान्य से अधिक ऊर्जा, प्रोटीन, आयरन और फोलिक एसिड की आवश्यकता होती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया कि वे ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध और मोटे अनाजों (जैसे बाजरा, रागी) को दैनिक आहार में शामिल करने की सलाह दें।
* धात्री (स्तनपान कराने वाली) माताओं की देखभाल: शिशु के जन्म के शुरुआती छह महीनों तक केवल स्तनपान कराने की महत्ता पर जोर दिया गया। मां के बेहतर स्वास्थ्य और पर्याप्त दूध उत्पादन के लिए धात्री महिलाओं के आहार में पर्याप्त तरल पदार्थ, कैल्शियम और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उपाय बताए गए।
* कुपोषण से बचाव: ग्रामीण बच्चों और महिलाओं को कुपोषण (Malnutrition) के चक्र से बचाने के लिए संतुलित आहार (Balanced Diet) के महत्व को रेखांकित किया गया। डॉ. राजकुमारी ने समझाया कि कैसे सही समय पर सही पोषण देकर एनीमिया (खून की कमी) और बच्चों में सूखे रोग जैसी गंभीर समस्याओं को रोका जा सकता है।
आत्मनिर्भरता के लिए ‘किचन गार्डन किट’ का वितरण:
प्रशिक्षण के अंत में, सभी प्रतिभागी 25 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से ‘किचन गार्डन किट’ (पोषण वाटिका किट) निःशुल्क वितरित की गई। इस किट का उद्देश्य यह है कि कार्यकर्ता अपने-अपने केंद्रों और गांवों में पोषण वाटिका तैयार कर सकें, ताकि गर्भवती व धात्री महिलाओं को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के ताजा, रसायन मुक्त और पोषक तत्वों से भरपूर सब्जियां (जैसे पालक, लौकी टमाटर, लोबिया आदि) आसानी से घर के पास ही उपलब्ध हो सकें।
डॉ. राजकुमारी ने कार्यक्रम के समापन पर सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे इस प्रशिक्षण में सीखी गई बातों को ग्रामीण स्तर पर हर घर तक पहुंचाएं, ताकि जालौन जिले को स्वस्थ और कुपोषण मुक्त बनाया जा सके।
