सनत कुमार बुधौलिया की रिपोर्ट
आज स्थित यह है कि राजनीतिक दल समाज को एक जुट करने के बजाय विभिन्न जातीय समूहों को वोट बैंक के रूप में देखने लगे हैं परिणाम स्वरूप , व्यक्ति की योग्यता,क्षमता और राष्ट्रीय योगदान दे अधिक उसकी जातीय पहचान को महत्व दिया जा रहा है। यह प्रवृति सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता दोनों के लिए चुनौती है यह बाएं राष्ट्रीय सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद सिंह ने सवर्ण चिंतन विषय पर आयोजित संगोष्ठी में कही जिसका संचालन समाज सेवी सवर्ण आर्मी के जिला अध्यक्ष पंकज शुक्ला ने किया था राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि हम मानते है कि किसी भी समुदाय का सम्मान उसकी प्रशासनिक श्रेणी से नहीं है,बल्कि उसके इतिहार, संस्कृत,परिश्रम और राष्ट निर्माण में योगदान से निर्धारित होनी चाहिए चाहिए किसी भी वर्ग को स्थाई रूप से श्रेष्ठ पिछड़ा उत्पीड़क या पीड़ित घोषित करना समाज के दीर्घकालीन हित में नहीं है समय आ गया है कि भारत जाति आधारित राजनीतिक ध्रुवीकरण से ऊपर उठकर समान अवसर,समान सम्मान और समान उत्तरदायित्व के सिद्धांत पर आगे बड़े, राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा का उद्देश्य लक्ष्य किसी वर्ग का विरोध नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था का निर्माण है जो प्रत्येक नागरिक को उसकी योग्यता और परिश्रम के आधार पर आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करे तथा समाज में समरसता न्याय और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करें। भारती जनता पार्टी द्वारा बटुक पूजन को लेकर तीखा हमला करते हुए कहा कि एक तरफ बटुक पूजन कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ सवर्ण बच्चे को जन्म जाती शोषण करता अपराधी बना दे रहे हैं चाहे जो भी हो जात यूजीसी रेगुलेशन को वापस करा कर ही मानूँगा सवर्ण समाज अभी कुंभ करड़ की नीद सो रहा है राजनीतिक दलों का दरी बिछाने और कुर्सी टेंट लगाने मे व्यस्त है आप सभी लोगों से कहना चाहूंगा कि राजनीतिक विकल्प मोर्चा आगामी चुनाव में उत्तर प्रदेश की 403 विधान सभा शीट पर अपना प्रत्यासी उतारेगा
