कथा के दूसरे दिन राजा परीक्षित जन्म और सुखदेव आगमन के प्रसंग का हुआ वर्णन

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के के श्रीवास्तव  अभिवादन एक्सप्रेस

 

 

झांसी। महावीर नगर सोना बुक डिपो वाली गली आरामशीन बी.एच.ई.एल. झांसी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन बुन्देलखण्ड के सुप्रसिद्ध कथा व्यास पंडित कृष्ण बिहारी तिवारी टिंकू महाराज भरसूडा वाले कोटरा ने परीक्षित जन्म,सुखदेव आगमन की कथा सुनाई। जिसे सुनकर श्रोता भाव विभोर हो उठे। कथा व्यास ने कहा कि युद्ध में गुरु द्रोण के मारे जाने से क्रोधित होकर उनके पुत्र अश्वत्थामा ने क्रोधित होकर पांडवों को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया। ब्रह्मास्त्र लगने से अभिमन्यु की गर्भवती पत्नी उत्तरा के गर्भ से परीक्षित का जन्म हुआ। परीक्षित जब बड़े हुए नाती पोतों से भरा पूरा परिवार था। सुख वैभव से समृद्ध राज्य था। वह जब 60 वर्ष के थे। एक दिन वह क्रमिक मुनि से मिलने उनके आश्रम गए। उन्होंने आवाज लगाई, लेकिन तप में लीन होने के कारण मुनि ने कोई उत्तर नहीं दिया। राजा परीक्षित स्वयं का अपमान मानकर निकट मृत पड़े सर्प को क्रमिक मुनि के गले में डाल कर चले गए। इस दौरान संगीतमय कथा में फौजी सम्राट डिकौली, हरिनारायण झबरा ढोलक पर, सुनील गौतम पैड पर संगत कर रहे है। कथा की आरती परीक्षित ज्योति विश्वकर्मा,लखन दास विश्वकर्मा ने की। इस मौके पर पंडित शैलेश तिवारी सोहरापुर जालौन,दयाशंकर बब्बा,शिव शंकर बब्बा,श्याम किशोर विश्वकर्मा,लखन दास,प्रेम नारायण,आशीष विश्वकर्मा, अनुपम,शिवेंद्र,महेंद्र,संजू विश्वकर्मा,अनुज कुमार,कृष्णा विश्वकर्मा,लक्ष्य विश्वकर्मा,दीप विश्वकर्मा सहित आदि मौजूद रहे। इस मौके पर भागवत का पूजन का पाठ संजय महाराज चित्रकूट,अमित महाराज कोटरा ने किया।

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