अनिल सक्सेना की रिपोर्ट
बांदा। कृषि उपज के वैज्ञानिक भंडारण, वेयरहाउसिंग सुविधाओं के उपयोग तथा भांडागारण विकास एवं विनियामक प्राधिकरण (डब्लूडीआरए) के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा के प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट निदेशालय के तत्वावधान में किसानों, व्यापारियों, किसान उत्पादक संगठनों के सदस्यों तथा दाल मिल संचालकों के लिए “भांडागारण विकास एवं विनियामक प्राधिकरण (डब्लूडीआरए) पर किसानों, व्यापारियों, एफपीओ एवं दाल मिल संचालकों के लिए एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम” का आयोजन कृषि प्रसार विभाग के सेमिनार हॉल में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को भांडागारण विकास एवं विनियामक प्राधिकरण (डब्लूडीआरए) पंजीकरण नियमों, पंजीकृत गोदामों की उपयोगिता, इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद(e-NWR) तथा भंडारण आधारित वित्तीय सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट निदेशक प्रो. भानु प्रकाश मिश्रा के स्वागत उद्बोधन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि डॉ. मुकुल कुमार, अधिष्ठाता, स्नातकोत्तर अध्ययन सहित मंचासीन अतिथियों एवं उपस्थित प्रतिभागियों का स्वागत किया। इस अवसर पर प्रो. मिश्रा ने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ उसकी सुरक्षित भंडारण व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि किसानों को उचित भंडारण सुविधा उपलब्ध हो जाए तो वे अपनी उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं और बाजार में उचित मूल्य मिलने पर उसे बेचकर अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किसानों, व्यापारियों, एफपीओ प्रतिनिधियों और दाल मिल संचालकों को डब्लूडीआरए से संबंधित नियमों, पंजीकरण प्रक्रियाओं, पंजीकृत गोदामों के लाभ, नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीदों की उपयोगिता तथा वैज्ञानिक भंडारण के महत्व से अवगत कराना इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अपनी कृषि उपज को डब्लूडीआरए पंजीकृत गोदामों में सुरक्षित भंडारित करने की दिशा में पहल करें, जिससे उन्हें बेहतर विपणन अवसर और वित्तीय सुविधाएं प्राप्त हो सकें।
मुख्य अतिथि प्रो. मुकुल कुमार ने अपने संबोधन में कृषि उपज के सुरक्षित भंडारण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कटाई के बाद होने वाली क्षति को कम करना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में बड़ी मात्रा में खाद्यान्न एवं अन्य कृषि उत्पाद भंडारण सुविधाओं के अभाव में नष्ट हो जाते हैं। यदि किसान वैज्ञानिक भंडारण तकनीकों को अपनाएं और प्रमाणित गोदामों का उपयोग करें तो फसल की गुणवत्ता एवं मात्रा दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
इस अवसर पर नेशनल ई-रिपॉजिटरी लिमिटेड (NERL) के प्रतिनिधि अनन्त कुमार पांडेय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों को वेयरहाउस संरचना की स्थापना के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वित्तीय संस्थानों और बैंकों की सहायता से ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक गोदामों की स्थापना की जा सकती है। इससे न केवल किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने की सुविधा मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने बताया कि वेयरहाउसिंग क्षेत्र में निवेश कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. अर्जुन प्रसाद वर्मा, सहायक प्राध्यापक (प्रभारी, मानव संसाधन विकास) द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि किसानों को बाजार आधारित कृषि प्रणाली से जोड़ने में वेयरहाउसिंग और इलेक्ट्रॉनिक वेयरहाउस रसीद प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि भांडागारण विकास एवं विनियामक प्राधिकरण (डब्लूडीआरए) द्वारा पंजीकृत गोदामों में रखी गई कृषि उपज के आधार पर किसान बिना उपज बेचे भी ऋण प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उन्हें तत्काल नकदी की आवश्यकता पूरी करने में सहायता मिलती है।
कार्यक्रम में बैंकिंग क्षेत्र की भूमिका पर प्रकाश डालने के लिए पंजाब नेशनल बैंक, मवई शाखा, बांदा के श्री रुद्र प्रताप मिश्र, बैंकिंग कृषि अधिकारी को विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों, व्यापारियों एवं एफपीओ प्रतिनिधियों को वेयरहाउस संरचना के वित्तपोषण तथा इलेक्ट्रॉनिक वेयरहाउस नेगोशिएबल रसीद (e-NWR) के आधार पर उपलब्ध गिरवी ऋण (Pledge Loan) की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैंक भांडागारण विकास एवं विनियामक प्राधिकरण (डब्लूडीआरए) पंजीकृत गोदामों में भंडारित कृषि उपज के विरुद्ध ऋण उपलब्ध कराते हैं, जिससे किसानों को अपनी उपज कम कीमत पर बेचने की मजबूरी नहीं रहती। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा कुल चार तकनीकी व्याख्यान आयोजित किए गए, जिनमें कृषि भंडारण एवं डब्लूडीआरए से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। पहला व्याख्यान डॉ. अमित कुमार यादव, सहायक अध्यापक, पादप रोग विज्ञान विभाग द्वारा किया गया। उन्होंने “कृषि जिंसों के वैज्ञानिक भंडारण के लाभ एवं कटाई उपरांत हानि को कम करने के उपाय” विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि अनुचित भंडारण के कारण कीट, रोग एवं नमी के प्रभाव से बड़ी मात्रा में कृषि उपज नष्ट हो जाती है। वैज्ञानिक भंडारण तकनीकों के माध्यम से इन नुकसानों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने किसानों को भंडारण से पूर्व सफाई, सुखाने, नमी नियंत्रण तथा कीट प्रबंधन संबंधी आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी। दूसरा व्याख्यान डॉ. एम.के. मिश्रा, सहायक अध्यापक, कृषि कीट विज्ञान विभाग द्वारा “किसान स्तर पर भंडारण की व्यवहारिक तकनीकें” विषय पर दिया गया। उन्होंने बताया कि किसानों को घरेलू एवं सामुदायिक स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए सुरक्षित भंडारण व्यवस्था विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कीट एवं चूहा नियंत्रण, स्वच्छता प्रबंधन तथा नियमित निरीक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उनके व्याख्यान से किसानों को अपने स्तर पर भंडारण क्षमता विकसित करने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी प्राप्त हुई। डॉ. बी.पी. मिश्रा (प्राध्यापक) ने सार्वजनिक वेयरहाउसिंग के लाभ विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक गोदाम किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर उपज बेचने से बचाते हैं। इसके अतिरिक्त, गोदामों में ग्रेडिंग एवं मानकीकरण की सुविधाएं उपलब्ध होने से उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार होता है तथा बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि उचित भंडारण से कृषि उपज की गुणवत्ता और मात्रा लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को लाभ मिलता है। चौथा एवं अंतिम तकनीकी व्याख्यान डॉ. अर्जुन प्रसाद वर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद, प्लेज फाइनेंस, वेयरहाउसिंग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम-2007 की प्रमुख विशेषताएं तथा इलेक्ट्रॉनिक वेयरहाउस रसीद (e-NWR) के लाभ विषय पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक वेयरहाउस रसीद प्रणाली पारदर्शिता, सुरक्षा एवं त्वरित वित्तीय सेवाएं सुनिश्चित करती है। इसके माध्यम से किसान अपनी उपज को गोदाम में सुरक्षित रखते हुए ऋण प्राप्त कर सकते हैं और बाजार में अनुकूल मूल्य मिलने पर ही बिक्री कर सकते हैं। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित इस व्यवस्था को कृषि विपणन में एक महत्वपूर्ण सुधार बताया।
इस एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम में कुल 32 किसानों, किसान उत्पादक संगठन के सदस्यों, दल मिल संचालकों आदि द्वारा प्रतिभाग किया गया l धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। प्रतिभागियों को निकटवर्ती भांडागारण विकास एवं विनियामक प्राधिकरण (डब्लूडीआरए) पंजीकृत वेयरहाउसिंग सुविधा का भ्रमण कराया गया।
