बुंदेलखंड को सीएम योगी का एक और बड़ा तोहफा*  *74.91 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही ‘सिंहवाहिनी पम्प नहर परियोजना’

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अनिल सक्सेना की रिपोर्ट

*बांदा: ।  बुंदेलखंड की प्यासी धरती और किसानों की सिंचाई की समस्या को दूर करने के लिए योगी सरकार लगातार ऐतिहासिक कदम उठा रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बांदा जिले को एक और बड़ा तोहफा दिया है। बबेरू तहसील क्षेत्र के कमासिन में 74.91 करोड़ रुपये की लागत से बन रही ‘सिंहवाहिनी पम्प नहर परियोजना’ का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। डबल इंजन सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता का ही नतीजा है कि महज ढाई साल से भी कम समय में इस परियोजना का 90 फीसदी काम पूरा कर लिया गया है।

 

*समय सीमा से पहले काम पूरा करने का रिकॉर्ड*

 

जल शक्ति विभाग इस परियोजना को उसकी तय समय-सीमा (नवंबर 2026) से काफी पहले पूरा करने में जुटा हुआ है। गौरतलब है कि इस मिशन की शुरुआत 06 दिसंबर 2023 को हुई थी। विपक्षी सरकारों के दौर में जहां बुंदेलखंड की योजनाएं दशकों तक फाइलों में दबी रहती थीं वहीं योगी सरकार के राज में रिकॉर्ड समय में काम निपटाया जा रहा है। आधुनिक तकनीकों और दिन-रात चल रहे काम की बदौलत अब यह परियोजना बुंदेलखंड के विकास की नई इबारत लिखने को तैयार है।

 

*हजारों किसानों की दूर होगी सिंचाई की किल्लत*

 

इस आधुनिक पम्प नहर की क्षमता 50 क्यूसेक है। इसके पूरी तरह चालू होते ही बबेरू तहसील के हजारों किसानों के खेतों तक सीधे पानी पहुंचेगा। कमासिन और आस-पास के दर्जनों गांवों के अन्नदाताओं को सालों से सिंचाई के लिए पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ता था। पानी की कमी के कारण फसलें बर्बाद हो जाती थीं लेकिन अब सिंहवाहिनी पम्प नहर से खेतों में हरियाली लौटेगी। किसानों की लागत कम होगी और उनकी आय में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।

 

*मिट रही बुंदेलखंड की प्यास, किसानों ने जताया आभार*

 

योगी सरकार के इस प्रोजेक्ट से स्थानीय किसानों में भारी उत्साह और खुशी की लहर है। क्षेत्र के ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि जो काम दशकों में नहीं हो सका उसे योगी सरकार ने रिकॉर्ड समय में धरातल पर उतार दिया है। ‘सिंहवाहिनी पम्प नहर’ सिर्फ एक परियोजना नहीं, बल्कि बबेरू के किसानों के लिए जीवनदायिनी साबित होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बुंदेलखंड की सदियों पुरानी प्यास अब पूरी तरह मिट रही है और यह क्षेत्र अब पिछड़ेपन के कलंक को धोकर खुशहाली के नए युग में प्रवेश कर रहा है।

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