अनिल सक्सेना की रिपोर्ट
बांदा। कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता, जरा एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो, इन पंक्तियों को चरितार्थ करते हुए एक होमगार्ड जवान के पुत्र ने इंडियन आर्मी में जूनियर कमीशंड अफसर बनकर न सिर्फ अपने परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि जनपद को भी गाैरवांवित करने का काम किया है।
अतर्रा तहसील के ओरहा गांव निवासी रिटायर्ड होमगार्ड जवान शिवश्याम शुक्ला के सुपुत्र आशुतोष शुक्ला उर्फ अनुज ने अपने दूसरे प्रयास में इंडियन आर्मी में जूनियर कमीशंड अफसर की परीक्षा पास करके अपने परिवार का नाम रोशन किया है। बता दें कि अनुज का पूरा जीवन अपने आप में कठिन संघर्ष का जीता जागता उदाहरण है। बताते हैं कि अनुज के जन्म के साथ ही उसकी मां का दुखद निधन हो गया और उसके पालन पोषण का जिम्मा चिल्ला क्षेत्र के पदारथपुर गांव निवासी फूफा फूलचंद्र तिवारी व बुआ सियादुलारी ने उठाया। अच्छे संस्कारों और संघर्ष के बीच अनुज खरा सोना बनकर निकला और सेना में जूनियर कमीशंड अफसर के रूप कामयाबी के शिखर तक पहुंचने में सफल रहा। अनुज की कामयाबी के साथ ही जहां उसके परिजनों ने खुशी का इजहार किया, वहीं उसके रिश्तेदारों ने भी उसका सफलता पर हर्ष व्यक्त किया। अनुज ने अपनी सफलता का श्रेय अपने बुआ-फूफा से मिले अच्छे संस्कारों और अपनी लगन व मेहनत के साथ ही अपने पिता को दिया है। अनुज की मानें तो उसे समय समय पर उसे भागवताचार्य पं.मानसमणि शास्त्री और ज्योतिषाचार्य आनंद तिवारी समेत कई अन्य रिश्तेदारों का भी मार्गदर्शन मिलता रहा है, जिससे उसकी कामयाबी को पंख लग सके हैं।
