*डेंगू दिवस पर गोष्ठी एवं शपथ ग्रहण हुआ सम्पन्न

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अनिल सक्सेना की रिपोर्ट

बांदा।    राष्ट्रीय डेगू दिवस मुख्य चिकित्सा अधिकारी महोदय डा0 विजेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में गोष्ठी का आयोजन एवं शपथ दिलाकर कर मनाया गया। जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि इस वर्ष राष्ट्रीय डेगू दिवस 16 मई 2026 श्ब्वउउनदपजल चंतजपबपचंजपवद क्मदहनम ब्वदजतवसए ब्ीमबाए ब्समंदए ब्वअमतश्‘‘डेंगू नियंत्रण के लिये जन भागीदारी , जॉच करें, सफाई करे, ढकें‘‘ की थीम के साथ मनाया जा रहा है। माह जून से अक्टूबर तक वेक्टर जनित रोगों को संक्रमण काल होता है इस मौसम में मच्छर जनित बुखार डेगू फैलने की सम्भावना अधिक रहती है डेगू एडीज मच्छर की दो प्रजातियों एडीज एल्बोपिक्ट्स एवं एडीज एजिप्टाई से फैलता है। एडीज मच्छर का प्रजनन स्थल 01 सप्ताह से अधिक, घरों के पात्रों में एकत्रित साफ ठहरा हुआ पानी है।

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी वी0बी0डी0 डा0 आर0एन0 प्रसाद बांदा ने डेगू बुखार के लक्षण एवं बचाव के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि डेगू बुखार एक कष्टदायक, शरीर को दुर्बल करने वाला मच्छर जनित रोग है। और जो लोग दूसरी बार डेगू वायरस से संक्रमित हो जाते है उनमें गम्भीर बीमारी विकसित होने का काफी अधिक जोखिम होता है। डेगू बुखार के लक्षण मच्छर के काटने के 04 से 10 दिनों के बाद दिखाई देने लगते है। यह मच्छर दिन में काटता है और काला सफेद चित्तीदार दिखाई देता है। डेगू से बचने किये लिये मच्छरों को काटने बचें एवं घर तथा घर के आसपास साफ पानी एकत्रित न होने दें।

लक्षण-अचानक तेज बुखार, ऑखों के पीछे दर्द, जोडो और मासपेसियों में दर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते पडना, प्लेटलेट्स तेजी से डाउन होना।

बुखार होने पर क्या करेंः-

1-सामान्य बुखार होने पर नजदीक के राजकीय चिकित्सालय /प्रा0स्वा0केन्द्र /सामुु0स्वा0केन्द पर रक्त की जांच

एवं उपचार अवश्य करायें। कोई भी बुखार डेगू हो सकता है।

2-घर के कूलर, बाल्टी घडे़ तथा ड्रम का पानी, फ्रिज ट्रे, नारियल के खोल, ओवर हैड टैंक, गमले, पशु पक्षियों को

रखे पानी के पात्र, टायर एवं अनउपयोगी पात्रों को साप्ताहिक अन्तराल पर खाली करते रहें।

3-घर के आस पास एवं गड्ढों में पानी एकत्रित न होने दे। पानी एकत्रित होने वाले स्थानों को मिट्टी से भर दे,

यदि सम्भव न हो तो, कुछ बूंद जले हुए मोबिल आयल को अवश्य डाल दे।

4-सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। शरीर पर मच्छर निरोधक क्रीम /नीम तथा सरसों के तेल का लेप खुले

भागों पर लगायें। नीम की पत्ती का धुआं करें।

5-बच्चों को फुल बॉह के कपडें, जूते मोजे पहनायें।

क्या न करेंः-

1-घर के आस पास छत पर तथा आंगन में पडे़ पुराने बर्तनों, टायर, कूलर फूलदान, गमले में पानी इकट्ठा न होने

दें। घर के आस पास कूड़ा एकत्रित न होने दें एवं सफाई पर ध्यान दें।

2-घर में यदि बुखार का रोगी है तो उसे बिना मच्छरदानी के न रहने दें अथवा ऐसे कमरें में रोगी की देखभाल

करें जिसके खिड़की तथा दरवाजे पर जालियां लगी हों।

3-.बुखार का रोगी बिना रक्त की जांच कराये दवा का इस्तेमाल न करें तथा खाली पेट दवा न खाये।

उक्त कार्यक्रम में जिला मलेरिया अधिकारी श्रीमती पूजा अहिरवार, सहायक मलेरिया अधिकारी श्री विजय बहादुर, जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार श्री प्रदीप कुमार कुशवाहा, एस0एल0टी0 श्री बृज विहारी, मलेरिया निरीक्षक श्री राज कुमार, श्री आनन्द मिश्रा, श्री परीक्षित द्विवेदी, श्री भानू प्रताप सिह एवं फाइलेरिया निरीक्षक श्री सूरज खिरिया, कीट संग्रहकर्ता, फील्ड सुपरवाइजर एवं फील्ड वर्कर उपस्थित रहे।

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