खैरागढ़ राजनीति में साजिश नाकाम: बिना शिकायत के गंभीर आरोप लगाकर छबि धूमिल करने की साजिश

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शिव शर्मा की रिपोर्ट

शिव शर्मा की रिपोर्ट

छुईखदान: खैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब भाजपा के दो बार के विधायक और पूर्व संसदीय सचिव कोमल जंघेल के खिलाफ देह शोषण के गंभीर आरोपों की खबरें अचानक मीडिया और सोशल मीडिया में प्रसारित होने लगीं। हालांकि बाद में सामने आया कि छुईखदान थाने में इस संबंध में कोई भी आधिकारिक शिकायत या एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी। लगातार चार दिनों तक थाने में रिपोर्ट दर्ज होने की खबरें चलती रहीं, जिससे क्षेत्र में भ्रम और राजनीतिक हलचल की स्थिति बन गई। लेकिन पुलिस रिकार्ड में किसी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं पाए जाने से पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला एक सुनियोजित साजिश के तहत एक लोकप्रिय नेता की राजनीतिक और सामाजिक छवि को धूमिल करने का प्रयास हो सकता है

कोमल जंघेल खैरागढ़ विधानसभा से पांच बार चुनाव लड़ चुके हैं, जिनमें दो बार विजयी रहे। वे पूर्व मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह के संसदीय सचिव भी रह चुके हैं और संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। वर्तमान में वे भाजपा ओबीसी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पदस्थ बताए जाते हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि खैरागढ़ क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ और जनाधार को देखते हुए इस तरह के आरोपों को राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है।

*राजनीतिक साजिश का  शिकार, सभी आरोप निराधार

किसान अधिकार संघर्ष समिति ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि किसी महिला पदाधिकारी द्वारा शिकायत दर्ज कराने की चर्चा असत्य है। समिति ने आरोपों को निराधार बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि झूठी खबरें किस स्रोत से प्रसारित हुईं और बिना शिकायत के रिपोर्ट दर्ज होने की अफवाह किसने फैलाई—इसकी विशेष जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी जनप्रतिनिधि या नागरिक की छवि को इस तरह नुकसान न पहुंचे। फिलहाल पूरे मामले ने खैरागढ़ की राजनीति को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में इस पर और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है

 

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