सनातन धर्म के जनक है आदि गुरुशंकराचार्यजी- श्री महेशानंदजी महाराज

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मंदसौर/नाहरगढ(तुलसीराम राठौर)-– मात्र 5 वर्ष की आयु में संन्यास लेने वाले आदिगुरु श्री शंकराचार्य जी ने देश में चार मठ की स्थापना की है। उक्त विचार मुख्यवक्ता महेशानंदजी महाराज मेनपुरिया ने आदी गुरु शंकराचार्य जी की व्यख्यान माला को सम्बोधित करते हुए कही। सोमवार को उत्कृष्ट विद्यालय मंदसौर में मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद द्वारा आयोजित व्याख्यान माला में श्री महेशानंदजी ने कहा की आदी गुरु शंकराचार्य जी ने अद्वेत दर्शन में कहा है की जगत में जिसे ढूढ़ रहै है वह वहा नहीं है। ईश्वर कही खोया नहीं है, जिसे हम ढूढ़ रहे हैओर हम उन्हें पाने के लिए इधर उधर भटक रहे है। आदि गुरु शंकराचार्य जी ने मां के आशीर्वाद से सन्यास लिया है। साथ ही अंतिम समय में मां के साथ रहे हैं। उन्होंने सनातन धर्म के प्रति अलख जगाते हुए चार मठों की स्थापना की है।
इस अवसर पर भागवताचार्य पंडित प्रियांश पुरोहित ने कहा की ने आदि गुरु शंकराचार्यजी ने अल्प आयु में ही पैदल भ्रमण करते-करते देश के चार कोनो में सस्कृति को जीवित रखते हुए चार मठ बनाये।
प्राचार्य उत्कर्ष विद्यालय मंदसौर के रविंद्र कुमार दवे ने कहा कि आदी गुरु शंकराचार्यजी ने अपनी संस्कृति को जीवित रखने के लिए उत्तर के मठ में दक्षिण के पुजारी को बिठाया। देश को संस्कृती के बारे में एक संदेश दिया।
सीएसपी जितेंद्रसिंह भास्कर ने कहा कि हम जिस समाज में रहते हैं उस सनातन धर्म की स्थापना ही आदिगुरु शंकराचार्य जी ने की थी। हम सभी अपने कर्तव्य का अच्छे से पालन करें। कार्यक्रम का उद्देश्य एवं अतिथि स्वागत उद्बोधन जिला समन्वयक तृप्ती वैरागी द्वारा दिया गया। इस अवसर पर मंच पर वीनू जी महाराज हरियाणा,सामाजिक कार्यकर्ता विनय दुबेला उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन विकासखंड समन्वयक मंदसौर अर्चना भट्ट ने किया। अंत में आभार विकासखण्ड समन्वयक विनोद गोड़ ने माना। इस अवसर पर मुकेश सोलंकी, अर्चना रामावत नवांकुर संस्था के प्रतिनिधि, मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के परामर्शदाता, विद्यार्थी एवं ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता विशेष रूप से उपस्थित थे।

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