निज संवाददाता
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच शुरू होते ही उपभोक्ता परिषद ने उठाया सवाल कहा पावर कॉरपोरेशन लेसा के लैब में कैसे स्वतंत्र जांच कर सकता है जो प्रबंधन स्मार्ट मीटर की तारीफ करता रहा है उसके नीचे के अभियंताओं के देखरेख में कैसे हो पाएगी स्वतंत्र जांच।
स्मार्ट प्रीपेड एमडीएम एचईएस के हार्डवेयर सॉफ्टवेयर सभी की जांच होने के बाद ही सच्चाई आएगी सामने लेसा के लैब में सभी सुविधाएं जांच की है ही नहीं ऐसे में वहां पर मीटर के सैंपल की जांच अपने आप में सवालिया निशान।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य श्री अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की तकनीकी जांच के लिए गठित कमेटी द्वारा गुपचुप तरीके से कार्य शुरू करना पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मध्यांचल विद्युत वितरण निगम (लेसा) की लैब में मीटरों के सैंपल की जांच की तैयारी की जा रही है, जबकि यह लैब स्मार्ट प्रीपेड मीटर की सभी आवश्यक तकनीकी जांचों के मानकों पर खरी नहीं उतरती और न ही वहां पर्याप्त हाईटेक सुविधाएं उपलब्ध हैं। एमडीएम हार्डवेयर सॉफ्टवेयर की जांच करने का कोई एक्सपर्ट नहीं है
उपभोक्ता परिषद का स्पष्ट मत है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले स्मार्ट प्रीपेड मीटर के सभी कंपोनेंट्स, एमडीएम (मीटर डेटा मैनेजमेंट), एचईएस आईटी एवं ओटी सिस्टम, सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर की गहन और स्वतंत्र जांच आवश्यक है। साथ ही, 45 डिग्री तापमान में कार्यक्षमता, वोल्टेज के उतार-चढ़ाव पर प्रदर्शन, तथा 35 केवी सर्ज टेस्ट जैसे महत्वपूर्ण परीक्षण भी अनिवार्य रूप से किए जाने चाहिए।
श्री वर्मा ने यह भी स्मरण कराया कि वर्ष 2012 में उपभोक्ता परिषद के दबाव के बाद आईआईटी कानपुर में दो मीटर कंपनियों के मीटरों की जांच कराई गई थी, जिसमें दोनों असफल पाए गए थे। ऐसे में यह सवाल उठता है कि पावर कॉरपोरेशन अपनी ही लैब में निष्पक्ष जांच कैसे सुनिश्चित करेगा। पावर कारपोरेशन को याद होगा कि जो दोनों मी कंपनियां असफल पाई गई थी आज वह स्मार्ट प्रीपेड मीटर भी बना रही है और उत्तर प्रदेश में धरने से लग रही है
उन्होंने कहा कि यदि पावर कॉरपोरेशन के अभियंता ही जांच प्रक्रिया का हिस्सा होंगे, तो निष्पक्षता पर संदेह बना रहेगा, क्योंकि प्रबंधन पहले ही कई बार सार्वजनिक रूप से यह दावा कर चुका है कि सभी मीटर सही कार्य कर रहे हैं और चेक मीटर एवं स्मार्ट मीटर की रीडिंग में कोई अंतर नहीं है।
उपभोक्ता परिषद ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी द्वारा कराई जाए, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञों की निष्पक्ष टीम शामिल हो। परिषद का मानना है कि पारदर्शी और वैज्ञानिक जांच के माध्यम से ही उपभोक्ताओं को न्याय मिल सकता है।
अंत में, परिषद ने प्रदेश सरकार और पावर कॉरपोरेशन से अपील की है कि इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि उपभोक्ताओं का विश्वास बना रहे।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि आईआईटी कानपुर के विभाग अध्यक्ष के साथ उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष भी क्वालिटी कंट्रोल कमिटी के सदस्य रहे हैं जिनके द्वारा पहले लंबी जांच की जा चुकी है और रिपोर्ट भी दी जा चुकी है लेकिन उसे समय बिजली कंपनियों के अभियंताओं को जांच से पूरी तरीके से अलग रखा गया था केवल वह सहयोग में काम कर रहे थे।
