लोक कला और संस्कृति के संरक्षण में युवाओं का महत्वपूर्ण योगदान** 

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अनिल सक्सेना की रिपोर्ट

बांदा। बुंदेलखंड कला, साहित्य एवं संस्कृति विभाग व नृत्यकला गृह के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जवारा लोकनृत्य कार्यशाला में जहां प्रतिभागी बच्चे लोक नृत्य व संस्कृति से रूबरू हो रहे हैं, वहीं लोक कला व संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की प्रेरणा ले रहे हैं। नृत्य कला गृह की संचालिका नृत्य गुरु श्रद्धा निगम के निर्देशन मंे आयोजित कार्यशाला में बच्चों को लोक नृत्य की बारीकियों से अवगत कराया जा रहा है।

शहर के स्वराज कालोनी में संचालित नृत्य कला गृह बच्चों को लोक कलाओं और नृत्य की सीख देने के साथ ही लोक संस्कृति से रूबरू कराने का जिम्मा बखूबी उठा रहा है। नृत्य कला गृह की संस्थापिका नृत्य गुरु श्रद्धा निगम के मार्गदर्शन में एक जून से लेकर 10 जून तक जवारा लोक नृत्य का प्रशिक्षण िदया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रतिभागियों को जवारा नृत्य का महत्व और उसकी बारीकियों से अवगत कराया जा रहा है और प्रतिभागियों को जवारा नृत्य में पारंगत करने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यशाला का जायजा लेने के लिए उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान लखनऊ के निदेशक अतुल द्विवेदी यहां पहुंचे और उन्होंने प्रतिभागी छात्राओं से संवाद किया। प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए निदेशक श्री द्विवेदी ने लोक कला व संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण बताई। उन्होंने बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत के रूप में स्थापित लोक नृत्य और संस्कृति के संवर्धन के लिए ऐसी कार्यशालाओं को अावश्यक बताया। कहा कि जिस प्रकार से नृत्य कला गृह पूर्ण समर्पण भाव से लोक कलाओं को जीवित रखने का प्रयास कर रहा है, ऐसे ही समाज के अन्य लोगों को भी आगे आना चाहिए। उन्होंने लोक कलाओं और संस्कृति के संवर्धन के लिए प्रयत्नशील नृत्य कला गृह को भरपूर सहयोग देने का आश्वासन दिया। लोक कला गृह की संस्थापक सचिव श्रद्धा निगम ने निदेशक श्री द्विवेदी का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि जवारा लोक नृत्य कार्यशाला में 30 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं और पूरे मनोयोग से लोक नृत्य की बारीकियां सीख रहे हैं। बताया कि 10 जून को कार्यशाला का समापन किया जाएगा।

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