हीटवेब/लू-प्रकोप से बचाव हेतु विभागवार एडवाइजरी

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विजय द्विवेदी की रिपोर्ट

उरई ।
अपर जिलाधिकारी(वि०/रा०) संजय कुमार ने बताया कि *उष्ण लहर का सामान्य जनजीवन पर संभावित प्रभाव*- सामान्य लोगो के लिए गर्मी सहनीय रहेगी परन्तु छोटे बच्चो, वृद्ध एवं गंभीर बीमारियों से ग्रषित लोगो के लिए स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। मजदूरों(औद्योगिक श्रमिक, खनन श्रमिक, मजदूर), किसानों एवं धूप में देर तक काम करने वाले लोगो मे निर्जलीकरण एवं लू लगने की सम्भवना है। पशुधन एवं खड़ी कृषि/बागवानी फसलों पर मामूली प्रभाव। *सलाह*- विशेष रूप से दोपहर के समय लम्बे समय तक धूप में रहने से बचे। हल्के रंग के हल्के, ढीले एवं सूती कपड़े पहने। धूप में जाते समय सिर को कपड़े टोपी या छतरी से ढककर रखे। निर्जलीकरण से बचने के लिये पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करे। खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिए ओआरएस, घर मे बने पेय जैसे लस्सी, तीरानी/चावल का पानी, नींबू पानी, छाछ आदि का उपयोग करे।खड़ी फसल वाले खेतो में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए शाम के समय बार-बार हल्की सिंचाई करे। खेती, खनन और अन्य खुले क्षेत्र की गतिविधियों को तदनुसार नियमित करने की आवश्यकता है। दोपहर के समय जानवरो को चराने से बचे और उन्हें पर्याप्त तरल पदार्थ के सेवन के साथ छाया में रखे। उन्होंने बताया कि कृषि पर लू का प्रभाव आधारित पूर्वानुमान- *अरहर फसल*- अवस्था परिपक्वता/कटाई/मढ़ाई, फसल पर असर पड़ने की संभावना- अधिक तापमान से फसल जल्दी पक सकती है और दानों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। सलाह- समय पर कटाई करे और फसल को खेत मे अधिक समय न रखे। *गेहूँ की फसल*- अवस्था कटाई/मढ़ाई, फसल पर असर पड़ने की संभावना अधिक तापमान से दाने सिकुड़ सकते है और उत्पादन घट सकता है। सलाह- तुरन्त कटाई करे तथा दानों को अच्छी तरह सुखाए। *मूंग फसल*- अवस्था अंकुरण/वानस्पतिक अवस्था, फसल पर असर पड़ने की संभावना अधिक तापमान से अंकुरण एवं प्रारम्भिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है। सलाह- हल्की सिंचाई करे तथा नमी बनाए रखे। *उड़द फसल*- अवस्था वानस्पतिक अवस्था, फसल पर असर पड़ने की सम्भावना अधिक तापमान से पौध वृद्धि प्रभावित हो सकती है। सलाह- हल्की सिंचाई करे तथा नमी बनाए रखे।
*स्वास्थ्य विभाग*- समस्त अस्पतालों में हीट स्ट्रोक के उपचार हेतु बेड, दवाईयाँ, ORS तथा IV Food की उपलब्धता,डॉक्टरों/पैरामेडिकल स्टॉफ को हीट स्ट्रोक प्रबंधन का प्रशिक्षण,BLS व ALS एम्बुलेंस सेवाओं का व्यापक प्रबंधन,अस्पतालों में कूलिंग सेन्टर्स व ठंडे पानी की व्यवस्था,हीटवेव के लक्षणों व उनसे बचाव हेतु जागरूकता कार्यक्रम।
*नगर पालिका/नगर पंचायत*- सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल, वाटर कूलर व छाया की व्यवस्था,अत्यधिक गर्मी के कारण कृषि हेतु नहरों एवं अन्य सिचाई स्त्रोतों के माध्यम से व्यापक जल आपूर्ति सुनिश्चित करना,नगरीय क्षेत्र में पौधे / हरियाली बढ़ाना व पानी का छिड़काव,बेसहारा, यात्रियों हेतु आश्रय स्थल का निर्माण व उसमें शीतलता हेतु कूलर / पंखे, गद्दे, स्वच्छ पेयजल इत्यादि की उपलब्धता
*अग्निशमन विभाग*- समस्त फायर टैन्डर्स, फायर एक्सटिंग्यूशर व अन्य उपकरणों की नियमित जाँच,आग लगने की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना,आमजनमानस को हीटवेव के दौरान अग्नि दुर्घटना से बचाव हेतु जागरूक करना।
*जिला पंचायत राज / जिला कार्यक्रम*- गांवों में पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना,पंचायत स्तर पर छायादार स्थान व विश्राम स्थल की व्यवस्था,गांवों में आशा आँगनवाड़ी कार्यकत्रियों व पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से हीटवेव से बचाव हेतु जागरूकता अभियान चलाना।
*शिक्षा*- अत्यधिक तापमान के दृष्टिगत स्कूलों के समय में परिवर्तन,छात्रों को हीटवेव से बचाव के उपायों की जानकारी देना।
*श्रम विभाग*- निर्माण स्थलों पर मजदूरों के लिये छाया, पीने का पानी एवं विश्राम का उचित प्रबंधन,अत्यधिक तापमान के कारण निर्माण स्थल पर कार्य समयावधि में परिवर्तन, ठेकेदारों / कार्यदायी संस्थाओं हेतु हीटवेव से बचाव के दिशानिर्देश जारी करना।
*जल संस्थान/जल निगम*- खराब हैंडपंप / पाइपलाइन / नलकूपों की मरम्मत करना,निरंतर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना,पानी की कमी वाले क्षेत्रों में टैंकर के माध्यम से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना।
*विद्युत विभाग*- खराब ट्रांसफार्मर की मरम्मत,गर्मी के दौरान निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना,अस्पतालों, नलकूपों / जल आपूर्ति केन्द्रों हेतु सुचारू विद्युत व्यवस्था बनाये रखना।
*पशुपालन*- पशुओं के लिये पानी एवं छाया की व्यवस्था,पशुपालकों को पशुओं को हीट स्ट्रोक से बचाव की जानकारी देना,पशु चिकित्सा केन्द्रों पर पर्याप्त संख्या में आवश्यक दवाओं का भण्डारण सुनिश्चित करना।
*कृषि विभाग*- कृषि विज्ञान केन्द्रों व कृषि अधिकारियों के माध्यम से किसानों को अत्यधिक तापमान के दृष्टिगत फसल प्रबंधन, सिचाई इत्यादि की नवीन तकनीकों की जानकारी देना,मौसम विभाग द्वारा जारी मौसम सम्बन्धी चेतावनी का किसानों के मध्य व्यापक प्रचार-प्रसार कराना।
*सिचाई विभाग*- नहरों, माइनरों व अन्य सिचाई स्त्रोतों की नियमित सफाई एवं रख-रखाव सुनिश्चित करना,अत्यधिक गर्मी के कारण कृषि हेतु नहरों एवं अन्य सिचाई स्त्रोतों के माध्यम से व्यापक जल आपूर्ति सुनिश्चित करना।
*परिवहन*- बस अड्डो पर यात्रियों हेतु पेयजल व छायादार स्थल की व्यवस्था,बस अड्डो व परिवहन केन्द्रों पर हीटवेव से बचाव हेतु क्या करें, क्या न करें संदेशों का व्यापक प्रदर्शन,अत्यधिक तापमान के दृष्टिगत बसों / वाहनों में फायर एक्सटिंग्यूशर व फर्स्ट एड किट की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
*वन विभाग*- अत्यधिक तापमान के दृष्टिगत जंगलों में आग की घटनाओं की सम्भावना बढ़ जाती है, जिसके दृष्टिगत आग नियंत्रण हेतु समस्त आवश्यक उपकरण, अग्निशमन व अन्य विभागों से उचित समन्वय स्थापित करना,वन क्षेत्रों में फायर लाइन की सफाई व उचित रख-रखाव सुनिश्चित करना जिससे आग के फैलाव को रोका जा सके।

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