रिपोर्ट राजेश कुमार मिश्रा गया जी बिहार
गया जी दांगी मिलन समारोह के अवसर पर बोले नेता बिनोद कुमार दांगी उन्होंने कहा कि आज हमारे देश में जिस तरह का शिक्षा व्यवस्था है| यह शिक्षा व्यवस्था आम आदमी से बहुत से बाहर होते जा रहा है |धीरे-धीरे जिस तरह से देश में आर्थिक विषमता है| इस तरह से शैक्षणिक विषमता है |आम भाषा में समझने की जरूर यह है |कि जिस तरह से रेल के जनरल डब्बा में आप चिनिया बादाम बेच सकते हैं| सरकारी स्कूल के बच्चे जनरल डब्बा है| लेकिन 2 A.C, 3 AC, 1 AC बादाम नहीं बेच सकते हैं| प्राइवेट स्कूल के बच्चे A.C डब्बे हैं | और कान्वेंट स्कूल के बच्चे हवाई जहाज है| ठीक उसी तरह का देश में शिक्षा व्यवस्था है| सरकार जितना शिक्षा पर खर्च कर रही है |उतना शिक्षा में गुणवत्ता नहीं है |सरकारी स्कूल के बच्चे पर सरकार जितना खर्च कर रही है |उतना में तो उस बच्चों को प्राइवेट स्कूल इतना व्यवस्था मिल सकता है| लेकिन सरकार नहीं चाहती है| कि देश का शिक्षा व्यवस्था आम आदमी तक पहुंचे ,और जब तक देश के पूरा तौर पर शिक्षित नहीं हो पाएंगे ,तब तक देश का विकास का पूरी तरह से पटरी पर नहीं लाया जा सकता है |बिहार सरकार जितना शिक्षा पर खर्च कर रही है| अगर सरकार चाहेगी तो शिक्षा का गुणवत्ता पूर्वक बच्चों को दिया जा सकता है| लेकिन अभी भी सरकारी स्कूल में बच्चों की उपस्थिति बहुत ही दयनीय स्थिति में है| बिहार के पूर्व शिक्षा सचिव श्री केके पाठक जी ने शिक्षकों को तो स्कूल में पहुंचने का लगभग टारगेट पूरा कर लिया था| लेकिन बच्चे का स्कूल में जितना पहुंचना चाहिए था| उतना नहीं पहुंच पाए| बहुत सारे बच्चे सरकारी स्कूल में एडमिशन ले लेते हैं| और प्राइवेट स्कूल में भी पढ़ते हैं |सिर्फ सरकार के योजना का लाभ लेने के लिए, मुझे लगता है ,कि जिस सरकारी शिक्षक सरकारी स्कूल में शैक्षणिक काम करते हैं |उस स्कूल में अपने बच्चों को भी एडमिशन कराने में शर्माते हैं| सरकार को व्यवस्था करना चाहिए की सरकारी जितने भी कर्मचारी या अफसर हैं |सभी के बच्चे को सरकारी स्कूल में एडमिशन कराने के लिए दबाव बनाना चाहिए ,तब जाकर समझ में आएगा ,की गुणवत्ता पूर्वक शिक्षा कैसे मिले आजादी के 75 साल में भी हम लोग शैक्षिक व्यवस्था का सुधार नहीं पाए ,पूरे तौर पर यह बहुत बड़ी विडंबना है| देश के लिए अब तो शैक्षणिक व्यवस्था इतना महंगा हो गया है| की आम आदमी से पहुंच से बाहर होते जा रहा है |ऐसे में बड़े स्तर के नौकरी की तैयारी में भी समस्या उत्पन्न हो रहा है |इस पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है|
