शिव शर्मा की रिपोर्ट
राजनांदगांव/डोंगरगढ़।
डोंगरगढ़ स्थित राम कृपा हॉस्पिटल से जुड़ा इलाज का मामला अब पूरी समयरेखा के साथ सामने आया है, जिसने इलाज की प्रक्रिया, मरीज को दी गई जानकारी और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता श्रीमती कीर्ति डकहा मंगलवार को सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगी और इसके बाद मीडिया के समक्ष पूरे घटनाक्रम को क्रमवार रखते हुए अपना दर्द साझा करेंगी।
पीड़िता के अनुसार, 1 अगस्त 2024 को वे पहली बार सीने में दर्द की शिकायत लेकर नर्सिंग होम पहुंची थीं। वहां डॉक्टर द्वारा इसे सामान्य दर्द बताया गया और सोनोग्राफी व मैमोग्राफी कराने की सलाह दी गई। जांच रिपोर्ट देखने के बाद उन्हें बताया गया कि कोई गंभीर समस्या नहीं है और तीन महीने तक दवाइयां लेने से दर्द ठीक हो जाएगा।
पीड़िता का कहना है कि दवाइयां लेने के बावजूद दर्द में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद 8 नवंबर 2024 को वे दोबारा नर्सिंग होम गईं। इस बार फिर सोनोग्राफी और मैमोग्राफी कराई गई, जिसमें “सिंपल सिस्ट” बताया गया। डॉक्टर ने इसे सामान्य बताते हुए कहा कि एक नॉर्मल ऑपरेशन करना पड़ेगा, साथ ही यह भी बताया गया कि ऑपरेशन भिलाई से आने वाले डॉक्टर द्वारा किया जाएगा।
पीड़िता के अनुसार, उन्हें 17 नवंबर 2024 को नर्सिंग होम में भर्ती किया गया और 18 नवंबर 2024 को ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दौरान निकाले गए सिस्ट को जांच के लिए भेजा गया। पीड़िता का कहना है कि ऑपरेशन से पहले और ऑपरेशन के बाद उन्हें यह जानकारी तक नहीं दी गई कि आखिर किस डॉक्टर ने उनका ऑपरेशन किया। न तो किसी ऑपरेटिंग डॉक्टर से उनकी मुलाकात कराई गई और न ही किसी प्रकार की विस्तृत जानकारी दी गई। इलाज के दौरान उन्हें दी जाने वाली दवाइयां और निर्देश लगातार तिवारी डॉक्टर द्वारा ही दिए जाते रहे।
पीड़िता का कहना है कि ऑपरेशन के बाद उनकी तबीयत में सुधार होने के बजाय हालत बिगड़ती चली गई। जब जांच के लिए भेजे गए सिस्ट की रिपोर्ट आई, तब उन्हें सेकंड स्टेज कैंसर होने की जानकारी मिली। इसके बाद वे नागपुर गईं, जहां वर्तमान में कैंसर का इलाज चल रहा है। पीड़िता का कहना है कि यदि प्रारंभिक चरण में ही सही जांच कर स्थिति स्पष्ट कर दी जाती, तो संभव था कि बीमारी पहले चरण में ही पकड़ में आ जाती।
भावुक स्वर में पीड़िता कहती हैं कि उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं और आज वे जिस गंभीर स्थिति में पहुंच चुकी हैं, उसने पूरे परिवार को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक संकट में डाल दिया है। मंगलवार को वे कलेक्टर से शिकायत दर्ज कराने के बाद मीडिया के सामने अपने इलाज से जुड़े तथ्य और दस्तावेज प्रस्तुत करेंगी।
फिलहाल मामला पीड़िता के कथनों और उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित है, जिसकी निष्पक्ष जांच प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जानी है। अब यह मामला सिर्फ एक इलाज का नहीं, बल्कि मरीज को समय पर सही जानकारी देने और पारदर्शिता बरतने की जिम्मेदारी का भी बन गया है।
