जीव की मति भगवान में हो तो दुर्गति नहीं हो सकती है : रामानंद

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राघवेन्द्र शर्मा की रिपोर्ट

माधौगढ(जालौन)।कस्वा में स्थित बडी माता मंदिर धाम में चल रही श्रीमदभागवत कथा के तीसरे दिन भगवताचार्य अन्तराष्टीय आचार्य रामानंद जी महाराज श्रीधाम वृंदावन ने मुख्य रूप से भगवान श्रीराम के चरित्र से भक्तों को सीख दी वहीं भक्तों को भक्ति के भाव को चित्रित किया।तो वहीं मति को भगवान में लगाने और दुर्गति से बचने के लिए अभिप्रेरित किया वहीं भगवान के चौबीस अवतारों, समुद्र मंथन, ध्रुव चरित्र, सती चरित्र और कपिल भगवान के जन्म से संबंधित कथाएँ सुनाई गई। इस दिन कर्दम ऋषि, सृष्टि की व्याख्या, मनु कन्याओं और नारद जी के पूर्व चरित्र जैसे प्रसंगों पर भी प्रकाश डाला सारगर्भित ढंग से डाला कथावाचक ने श्रोताओं को सत्यम परम धीमहि की वंदना और मानव जीवन में विवेक व श्रेष्ठ कर्म करने का संदेश दिया हैं। भगवान के चौबीस अवतार और समुद्र मंथन की कथा में, श्री कृष्ण के विभिन्न अवतारों का वर्णन किया जिसमें भगवान विष्णु के समुद्र मंथन की कथा भी सुनाई । मानव हृदय के अच्छे और बुरे विचारों के मंथन के रूप में भी समझाया गया।
कर्दम ऋषि और कपिल भगवान का जन्म की कथा के इस भाग में, ऋषि कर्दम और देवहूती के विवाह, कर्दम ऋषि की कन्याओं और भगवान कपिल के उनके घर जन्म लेने की कथा का वर्णन किया है। कथा में नवधा भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला है।

 


श्रोताओं को बालक ध्रुव की भक्ति और भगवान विष्णु की कृपा की कहानी सुनाई , और माता सती के त्याग, भक्ति और भगवान शिव के प्रति समर्पण का मार्मिक वर्णन किया । अश्वत्थामा द्वारा द्रौपदी के पुत्रों के वध, नृसिंह अवतार, अजामिल और प्रह्लाद चरित्र जैसे प्रसंगों का भी वर्णन किया। मनु और शतरूपा से सृष्टि के विस्तार की कथा सुनाई , जिसमें मनु के पुत्रों और पुत्रियों का भी वर्णन किया। कथा का मुख्य संदेश होता है कि मनुष्य को विवेक और श्रेष्ठ कर्मों के साथ जीवन जीना चाहिए, क्योंकि भगवान के नाम मात्र से भवसागर से पार हुआ जा सकता है। इस मौके पर श्री श्री 108 अरविंद दास महाराज महंत बडी माता मंदिर पारीक्षत रानी तरसौलिया – रामकुमार तरसौलिया सहित अन्य भक्तों की मौजूदगी रही ।

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