भगवान का भजन करने से मनुष्य भव सागर से तर जाता है : आचार्य पुष्पेन्द्र द्विवेदी*

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राघवेन्द्र शर्मा की रिपोर्ट

उरई(जालौन)। सिद्धपीठ ठड़ेश्वरी मन्दिर उरई में 2005 से लगातार नव वर्ष के शुभागमन पर सिद्धपीठ के महन्त श्री सिद्ध रामदास महामण्डेश्वर जी के सानिध्य में प्रति वर्ष होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में रासलीला के बाद आज तीसरे दिन आचार्य पं.श्रीकांत मिश्र जी ने 12 बजे से 2 बजे मध्यान्ह तक अपने मुखारविंद से सती चरित्र एवं भगवान श्री शंकर जी व पार्वती जी के शुभ विवाह की कथा को विस्तार से सुना कर भक्त गणों को भावा विभोर कर दिया। वहीं आचार्य पं.श्री पुष्पेन्द्र द्विवेदी जी श्रीमद् भागवत कथा में आज तीसरे दिन ध्रुव चरित्र,जड़ भरत चरित्र, प्रहलाद चरित्र की कथा को विस्तार से अपनी मधुर वाणी से भक्त गणों को सुना कर मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जब गृहस्थ लोग कटहल की सब्जी बनाने के लिए उसे चाकू से काटते हैं तो उसमें चाकू व हाथ चिपकते हैं।जब उसमें कड़ुआ तेल चाकू व हाथ में लगाकर उसे जब काटा जाता है तो उसमें चाकू व हाथ नहीं चिपकते हैं।इसी तरह भगवान को पाने के लिए प्राणी सच्चे मन से भगवान का भजन करता है। तो वह अवश्य ही भगसागर से तय जाता है। और भगवान उसकी मदद करते हैं।
उन्होंने कहा कि उपरोक्त धार्मिक कार्यक्रम में प्रतिदिन 12 बजे से 2 बजे तक श्री राम कथा होगी तथा अपराह्न 2 बजे से 5 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा चलेगी।
उपरोक्त कार्यक्रम में पारीक्षित श्री अजय बाजपेई व उनकी धर्मपत्नी श्रीमती गीता बाजपेई ने सभी भक्त गणों से अपील की है कि उपरोक्त धार्मिक कार्यक्रम में अवश्य शामिल हों।
सिद्धपीठ ठड़ेश्वरी मन्दिर उरई में श्रीमद् भागवत कथा एवं श्रीराम कथा 31 दिसंबर तक चलेगी। जिसके समापन पर 1 जनवरी 2026 को हवन पूजन के बाद विशाल भण्डारा आयोजित किया जाएगा।
महन्त श्री श्री सिद्ध रामदास महामण्डेश्वर जी ने सभी भक्त गणों से अपील की है कि उपरोक्त थार्मिक कार्यक्रमों में अवश्य शामिल होकर अपने जीवन को धन्य बनाये।

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