रिपोर्ट सोनू करवरिया
नरैनी। घरेलू विद्युत समायोजन की जांच के नाम पर बिजली विभाग की टीम द्वारा दो ग्रामीण उपभोक्ताओं से बीस-बीस हजार रुपये की अवैध वसूली किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इसके बाद भी दोनों उपभोक्ताओं को करीब 55 हजार रुपये की बिजली चोरी का नोटिस थमा दिया गया, जिससे पीड़ितों के होश उड़ गए।
क्षेत्र के कबौली गांव निवासी अनवर अहमद और तहव्वर ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्रों में आरोप लगाया है कि 14 अक्टूबर को अतर्रा खंड के बिजली जांच अधिकारी, लाइनमैन व अन्य कर्मचारियों की टीम उनके घर पहुंची थी। बिना किसी प्रकार की बिजली चोरी पकड़े, अधिकारियों ने उन पर अपराधियों जैसा मानसिक दबाव बनाते हुए कहा कि तत्काल 20 हजार रुपये देने पर पुराने मीटर का बकाया माफ कर दिया जाएगा।
पीड़ितों का आरोप है कि दबाव में आकर उन्होंने 18 हजार रुपये नकद तथा दो हजार रुपये कथित अधिकारी द्वारा बताए गए मोबाइल नंबर पर यूपीआई के माध्यम से भुगतान किया। यूपीआई भुगतान के दौरान अनिरुद्ध राजपूत नाम प्रदर्शित हुआ। रुपये देने के बाद जब उन्होंने रसीद मांगी तो अधिकारियों ने देने से इनकार कर दिया।
पीड़ितों ने बताया कि 17 अक्टूबर को उनके व्हाट्सएप नंबर पर कथित अधिकारियों द्वारा संदेश भेजा गया, जिसमें यह लिखा था कि खंडीय अधिकारी द्वारा दोबारा जांच किए जाने पर किसी प्रकार की बिजली चोरी नहीं पाई गई है और न ही कोई मुकदमा या जुर्माना किया जाएगा।
इसके बावजूद 30 अक्टूबर को अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड अतर्रा कार्यालय की ओर से 55,892 रुपये जमा करने का नोटिस जारी कर दिया गया। नोटिस में 15 दिनों के भीतर धनराशि जमा न करने पर आरसी काटने की चेतावनी दी गई है।
पीड़ित उपभोक्ताओं का कहना है कि जांच के नाम पर रुपये की ठगी करने वाले अधिकारी व कर्मचारियों ने उनके साथ धोखाधड़ी की है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए दोषियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने तथा विभागीय कार्रवाई की मांग की है।
इस संबंध में विद्युत विभाग के अवर अभियंता रविंद्र ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
