लखनऊ – मानवाधिकार जनसेवा परिषद विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी पूजित मूर्तियों सम्मानजनक विसर्जन करेगा।
एक ज्वलंत प्रश्न यह है कि सभी हिन्दू परिवारों में दिवाली पर पूजा हेतु भगवान श्री गणेश एवं लक्ष्मी जी की पूजा होती है। पूजन के पश्चात् लोग पूजित व पुरानी खण्डित मूर्तियों को पेड़ों के नीचे, पार्कों, सार्वजनिक स्थानों पर रख देते हैं या गोमती नदी में प्रवाहित करते हैं। गोमती नदी में प्रवाहित करने से नदी का जल प्रदूषित होता है।
मानवाधिकार जनसेवा परिषद के अध्यक्ष रूप कुमार शर्मा ने बताया कि भगवान की मूर्तियों को सार्वजनिक स्थानों पर अपमानजनक स्थिति में देखकर मानवाधिकार जनसेवा परिषद ने मूर्तियों को एकत्रित कर सम्मानजनक विसर्जन करने का निर्णय लिया था तथा विभिन्न स्थानों पर संग्रह स्थल बनाकर मूर्तियां एकत्रित की जाती हैं। परिषद विगत कई वर्षों से नागरिकों से मूर्तियों का विसर्जन कर रहा है। मूर्तियों के विसर्जन हेतु कई स्थानों पर संग्रह स्थल बनाए जाते हैं। उसके बाद मूर्तियों को एकत्रित करके सम्मानजनक ढंग से विसर्जन किया जाता है।
मानवाधिकार जनसेवा परिषद के अध्यक्ष रूप कुमार शर्मा ने नागरिकों से अपील की है कि पूजित मूर्तियों को इधर-उधर न रखें वरन् परिषद द्वारा बनाए गए संग्रह स्थलों पर रखें ताकि मूर्तियों का सम्मानजनक ढंग से विसर्जन किया जा सके।
मूर्तियों के सम्मानजनक विसर्जन हेतु संग्रह स्थलों का विवरण निम्नलिखित है –
1. रूप कुमार शर्मा, 3/44, विवेक खण्ड, गोमतीनगर, लखनऊ
2. प्रदीप कुमार शर्मा, 4/93, विनय खण्ड, गोमतीनगर, लखनऊ
3. सुश्री आशा, 6/452, विनीत खण्ड, गोमतीनगर, लखनऊ
4. श्रीमती सविता शुक्ला, 14/89, निकट रानी लक्ष्मीबाई स्कूल, इंदिरा नगर, लखनऊ
5. श्रीमती रेनू तिवारी, सी 2250, निकट दाना-पानी, इंदिरा नगर, लखनऊ
6. श्रीमती कुसुम वर्मा, निकट संकटमोचन मंदिर, कौशलपुरी, गोमतीनगर विस्तार
