भू-माफियाओं की नजर करोड़ों की सरकारी जमीन पर, अधिवक्ता ने खोला फर्जीवाड़े का राज

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सोनू करबरिया की रिपोर्ट

नरैनी। कस्बे की करोड़ों रुपये मूल्य की कीमती जमीन पर भू-माफियाओं द्वारा कब्जा करने की कोशिश का मामला सामने आया है। यह जमीन गाटा संख्या 818, रकबा 0.394 हेक्टेयर, पूर्व में तालाब के रूप में दर्ज थी। बाद में राजस्व विभाग के कुछ जिम्मेदार कर्मचारियों की लापरवाही या मिलीभगत से इसे आबादी भूमि में दर्ज कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार, कस्बे के एक जमींदार ने यह भूमि जल संस्थान कार्यालय के लिए दान की थी। इस गाटा पर कुल छह व्यक्तियों के मिनजुमला नंबर दर्ज हैं।

अधिवक्ता जितेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2002 में उक्त भूमि का फर्जी बैनामा डॉ. राजेंद्र नामक व्यक्ति के नाम कराया गया था, जबकि उस स्थान पर कोई खाली भूमि मौजूद नहीं थी। राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से जल संस्थान कार्यालय की चौहद्दी को गलत तरीके से दर्ज कराया गया और वर्ष 2005 में यह जमीन किदवई नगर निवासी मुरीफ पुत्र मुल्लू को बेच दी गई।

अधिवक्ता ने बताया कि भूमि पूर्व में तालाब होने के कारण स्थानीय नागरिकों का यहां सार्वजनिक निस्तार स्थल था, इस कारण से खरीददार कभी भी इस भूमि पर कब्जा नहीं कर सका।

वर्तमान में फर्जी बैनामा धारक द्वारा दोबारा कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित इस भूमि की कीमत लगभग ढाई करोड़ रुपये आंकी गई है।

अधिवक्ता जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि इस पूरे प्रकरण की शिकायत राजस्व और पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों से की गई है तथा फर्जीवाड़े में संलिप्त लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

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