सुनील सक्सेना की रिपोर्ट
बाँदा , जनपद में पत्रकारों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है, लेकिन इस बढ़ती भीड़ के बीच असली पत्रकारिता कहीं गुम होती नज़र आ रही है। जिले में ऐसे कई लोग भी पत्रकार बने घूम रहे हैं जिनका न तो समाचार जगत से कोई नाता है और न ही उनकी कोई खबरें अखबारों या चैनलों पर प्रकाशित हो रही हैं।
सूत्रों का कहना है कि कुछ संदिग्ध व अपराधिक प्रवृत्ति के लोग अपने काले कारनामों और आपराधिक इतिहास को छिपाने के लिए पत्रकारिता की आड़ ले रहे हैं। हालात यह हैं कि प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी इनसे परेशान हैं। अधिकारियों पर दबाव बनाने और ब्लैकमेलिंग के आरोपों में कुछ तथाकथित पत्रकारों के गैंग सक्रिय बताए जाते हैं।
सूत्रों तो यह भी बताते है कि कई राष्ट्रीय चैनल ऐसे भी है जिनके अधिकारिक संवाददाता जनपद मे है ही नही फिर भी उनकी आईडी लेकर कौन चलता है ये भी जांच का विषय है ।
डिजिटल युग में यूट्यूब व सोशल मीडिया के बढ़ते दायरे ने भी पत्रकारिता के स्वरूप को बदल दिया है। अब सैकड़ों नए-नए यूट्यूबर पत्रकार का दावा कर रहे हैं। कंप्यूटर और मोबाइल तकनीक जानने भर से कई लोग “पत्रकार” बन गए हैं। यही कारण है कि अधिकारी भी प्रेस ब्रीफिंग से परहेज़ करने लगे हैं।
ऐसे मे उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त पत्रकार समिती ने आज जिलाधिकारी बाँदा और पुलिस अधीक्षक महोदय से मिलकर सभी पत्रकारों का पुलिस द्वारा सत्यापन कराये जाने और पत्रकारों को कलेक्ट्रेट परिसर मे बैठने के लिये समुचित व्यवस्था कराये जाने की मांग की , जिस पर जिलाधिकारी महोदया ने आश्वस्त करते कहा कि आप लोग कलेक्ट्रेट परिसर का निरीक्षण कर ले और स्थान देख ले प्रशासन आपके बैठने की उचित व्यवस्था करवा दी जाएगी, और पुलिस वेरीफिकेशन के लिये जिला सूचना अधिकारी कार्यालय से पत्राचार के लिये भी कहा। वहीं पुलिस अधीक्षक ने भी पत्रकारो की समस्याओ का संज्ञान लेते हुये पूरे जनपद मे जल्द ही प्रेस लिखे वाहनो की चेकिंग कराकर विधिक कार्यवाही कराने की बात की ।मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के संयौजक शिवकांत अवस्थी के साथ सुनील सक्सेना,अभय निगम,नंदकिशोर शिवहरे, इकबाल खान और राजेश पाण्डेय मान्यता प्राप्त पत्रकार के साथ अनवर रजा रानू सहित अन्य कई पत्रकार साथी मौजूद रहे।
