अनिल सक्सेना की रिपोर्ट
बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बाँदा के कृषि अभियांत्रिकी एवं तकनीकी महाविद्यालय द्वारा 14 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक आयोजित ड्रोन प्रशिक्षण एवं डेटा साइंस कार्यक्रम उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अंतर्गत विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों के कुल 600 स्नातक विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिसमें 200 विद्यार्थियों ने ड्रोन तकनीक तथा 400 विद्यार्थियों ने डेटा साइंस का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
प्रशिक्षण के दौरान कृषि में ड्रोन तकनीक की उपयोगिता, मृदा विश्लेषण, कृषि रसायनों का सटीक अनुप्रयोग, फसल निगरानी, सिंचाई प्रबंधन एवं फसल स्वास्थ्य मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी गई। साथ ही, कृषि एवं संबद्ध विज्ञान में डेटा साइंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा मशीन लर्निंग की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इन आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कृषि कार्यों की दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ समय, श्रम एवं जल की बचत की जा सकती है। डेटा एनालिटिक्स आधारित तकनीकों को भारतीय कृषि के आधुनिकीकरण और किसानों की उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सुरेन्द्र कुमार सिंह, पूर्व कुलसचिव, बीयूएटी, तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. ए.के. श्रीवास्तव, नोडल अधिकारी, आईसीएआर समन्वय प्रकोष्ठ उपस्थित रहे। इस अवसर पर डॉ. जी.एस. पंवार, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय तथा डॉ. अजय कुमार सिंह, निदेशक, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि, उद्यानिकी, वानिकी, कृषि अभियांत्रिकी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वयन डॉ. सुनील कुमार एवं डॉ. गजेन्द्र सिंह द्वारा किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में डॉ. रमेश पाल मौर्य, सह-अधिष्ठाता, कृषि अभियांत्रिकी एवं तकनीकी महाविद्यालय तथा डॉ. संजीत कुमार, सह-प्राध्यापक, मृदा एवं जल संरक्षण अभियांत्रिकी विभाग उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. नीलम बुनकर, सहायक प्राध्यापक ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जे. हिमांशु राव, सहायक प्राध्यापक द्वारा प्रस्तुत किया गया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों एवं डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया से परिचित कराने तथा कृषि क्षेत्र में तकनीकी दक्षता विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।